अडानी और महिंद्रा ने पीपावाव शिपयार्ड को खरीदने में दिखाई रुचि

SURAT, INDIA: Generic images of ABG Shipyard facility in Surat, India. (Photo by Ashesh Shah/Mint via Getty Images)
SURAT, INDIA: Generic images of ABG Shipyard facility in Surat, India. (Photo by Ashesh Shah/Mint via Getty Images)

रक्षा मंत्रालय के 101 हथियारों के आयात पर रोक लगाने के बाद शिपयार्ड के दिन सुधरेंगे

भारत एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री ने वर्ष 2024 तक सुरक्षा उपकरणों और हथियारों के घरेलू उत्पादन देने का फैसला लिया है। इसी के चलते 101 हथियारों के आयात पर रोक भी लगा दी गई है। इसी के चलते गुजरात के पीपावाव स्थित शिपयार्ड के दिन सुधरने वाले हैं। गौतम अडानी और आनंद महिंद्रा जैसे बड़े कारोबारी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। बता दें कि रिलायंस नैवल और इंजीनियरिंग लिमिटेड(RNaval) द्वारा संचालित इस शिपयार्ड को युद्ध में इस्तेमाल होने वाले जहाजों का निर्माण करने का परमिट प्राप्त है।

रक्षा मंत्रालय के देश में ही हथियार निर्माण के फैसले से कारोबारियों की दिलचस्पी पीपावाव शिपयार्ड में बढ़ गई है। इस शिपयार्ड को युद्ध में इस्तेमाल होने वाले जहाजों का निर्माण करने की सरकारी अनुमति प्राप्त है। पिछले वर्ष अडानी डिफेंस सिस्टम व टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ साझेदारी कर भारतीय जल सेना के लिए छह पनडुब्बी बनाने में दिलचस्पी दिखाई थी। वहीं वर्ष 2015 में महिंद्रा ग्रुप ने पीपावाव शिपयार्ड को उसके असली प्रमोटर से खरीदने की इच्छा जताई थी मगर यह शिपयार्ड अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप को बेच दिया गया। 

रिलायंस नैवल और इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा संचालित यह शिपयार्ड 43,587 करोड़ का बकाया कर्ज होने की वजह से खुद को दिवालिया घोषित कर चुका है। इसी वजह से रिलायंस ग्रुप ने इसे बेचने की तैयारी कर ली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, रक्षा मंत्रालय ने फ्लोटिंग डॉक, पनडुब्बी लांचर समेत 101 हथियारों के आयात पर रोक लगाई है। यह फैसला भारत में हथियारों के निर्माण करने की क्षमता बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। यह फैसला निश्चित तौर पर भारत के रक्षा उत्पादन की खपत बढ़ाने में मदद करेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को आत्मनिर्भर बनाने का हिस्सा है। 

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