आर नेवल(Rnaval) को खरीदने के लिए कई विदेशी कंपनियां लगा रही दांव

MUMBAI, INDIA  MAY 7, 2007: Control and raiser platform at reliance industries Krishna Godavari Water Basin. (Photo by Abhijit Bhatlekar/Mint via Getty Images)
MUMBAI, INDIA MAY 7, 2007: Control and raiser platform at reliance industries Krishna Godavari Water Basin. (Photo by Abhijit Bhatlekar/Mint via Getty Images)

अनिल अंबानी की दिवालिया कंपनी आर नेवल(Rnaval) को खरीदने के लिए कुछ रूसी कंपनियां इच्छा जाहिर कर रही हैं। यूनाइटेड शिपबिल्डिंग(United shipbuilding) और चौगुले (Chowgule) इस दौड़ में सबसे आगे हैं।

रूस की कंपनी यूनाइटेड शिपबिल्डिंग(United shipbuilding) और चौगुले (Chowgule) सहित आधा दर्जन व्यासायिक कंपनियां आर नेवेल(Rnaval) को खरीदने की दौड़ में शामिल हैं। आर नेवल(Rnaval), अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप का दिवालिया शिपयार्ड है। इसका पूरा नाम रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड है।

आर नेवल(Rnaval), जो सरकार से अनुमति लेकर युद्धपोतों का निर्माण करता है, वो 43,587 करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है। उसे इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत बेचा जा रहा है। इससे वित्तीय लेनदारों के 10,878 करोड़ रुपए का भुगतान तो हो जाएगा, बाकी बचे हुए 32,693 करोड़ रुपए को वसूलने के संदर्भ में अन्य प्रक्रिया चल रही है। परिचालन लेनदारों ने कंपनी पर 1,922 करोड़ रुपए के कर्ज का दावा किया है, इसमें कंपनी ने अब तक 485 करोड़ रुपए के दावे को स्वीकारा है। 

खरीदने की रेस में एपीएम टर्मिनल्स मैनेजमेंट, हेज़ल मर्केंटाइल लिमिटेड, जैसी अन्य कंपनियां भी शामिल है। रूस की यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही है। यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉर्पोरेशन रूस में 40 गज के दायरे में फैली हुई है। रूस की नेवी के लिए एवं तमाम विदेशी ग्राहकों के लिए बनाई जाने वाली सारी युद्धपोत इसी कंपनी द्वारा निर्मित की जाती है।

चौगुले समूह, जो एक अन्य दावेदार है, वे गोवा में दो शिपयार्ड चलाते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में एक स्थान पर यह जहाज मरम्मत की सुविधा भी प्रदान करते हैं। हेज़ल मर्केंटाइल, वेरिटास समूह की एक इकाई है।

एपीएम टर्मिनल्स मैनेजमेंट, जो कि डेनिश शिपिंग समूह एपी मोलर मर्सक ग्रुप ए / एस का  कंटेनर टर्मिनल ऑपरेटिंग यूनिट है, इसका इस दौड़ में शामिल होना एक आश्चर्यजनक घटना के रूप में उभरा है। वह आर नेवल(Rnaval) के शिपयार्ड से सटे पिपावाव में एक बंदरगाह चलाता है। ऐसा अनुमान है कि इस खरीद में उसकी दिलचस्पी इस कारण से है ताकि वह शिपयार्ड की जमीन पर बंदरगाह का थोड़ा और विस्तार कर सके।

सवाल ये भी है की बोली लगाने वालों के लिए आर नेवल(Rnaval) इतना दिलचस्पी का विषय क्यों बना हुआ है? दरअसल भारत सरकार ने 101 हथियार और सैन्य प्लेटफार्म के आयात पर 2024 तक प्रतिबंध लगा दिया है, ऐसा भारत में रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। बस उसी वक्त से विदेशी कंपनियों की रुचि आर नेवल(Rnaval) को खरीदने में बढ़ने लगी, ताकि वे उन हथियारों का भारत में उत्पादन कर सकें जिन पर सरकार ने आयात के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

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