श्रीलंका में कैसे हुई संकट की शुरुआत, अब नए प्रधानमंत्री होंगे नियुक्त

श्रीलंका में कैसे हुई संकट की शुरुआत, अब नए प्रधानमंत्री होंगे नियुक्त

आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका (Sri Lanka) में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे. लोगों के गुस्से में पड़ोसी देश में आगजनी, हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रहीं हैं. वहीं, लोगों के निशाने पर महिंदा राजपक्षे (Mahinda Rajapaksa) के साथ-साथ उनकी कैबिनेट में मंत्री रहे नेता और सांसद भी शामिल हैं. आगजनी, हिंसा की घटनाओं के बीच, सेना फिर हालात काबू में करने के लिए सड़कों पर आ गई है. फिलहाल, श्रीलंका में दोबारा आपातकाल लगा दिया गया है और सड़क पर दिखते ही लोगों को गोली मारने के आदेश दिये गए हैं.

बीते सोमवार, श्रीलंका में हालत फिर से बेकाबू हो गए. हिंसा में कुल 8 लोगों की जान चली गई. इसके साथ-साथ, 88 वाहनों और 100 से ज्यादा घरों को जला दिया गया . वहीं, श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू पिछले कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले 80 फीसदी से ज्यादा कम हो चुकी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि मार्च में श्रीलंका में 1 डॉलर की कीमत 201 श्रीलंकाई रुपये थी, जो अब 360 श्रीलंकाई रुपये पर आ चुकी है. वहीं, श्रीलंका में महंगाई दर 17 फीसदी को भी पार कर चुकी है, जो पूरे दक्षिण एशिया के किसी भी देश में महंगाई का सबसे भयानक स्तर है.

श्रीलंका के प्रधानमंत्री बनने को तैयार हुए साजिथ प्रेमदासा

श्रीलंका में संकट के बीच, विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा (Sajith Premadasa) को प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है. इस बीच, सांसद लक्ष्मण किरीएला (Lakshman Kiriella) का बयान आया है. उन्होंने कहा, कि साजिथ प्रेमदासा तभी प्रधानमंत्री बनेंगे, जब राष्ट्रपति अपने पद से इस्तीफा देंगे. बता दें, कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के भाई हैं.

आर्थिक संकट के बाद, श्रीलंका का हाल

श्रीलंका में अनाज के लिए मारा-मारी मची हुई है. दूध-दवा की कीमतें आसमान छु रहीं हैं. वहीं, 16-16 घंटे की बिजली की कटौती की जा रही है. एटीएम खाली हैं. घरेलू सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लगी हुई हैं. ऑटो ड्राइवर ईंधन के इंतजार में घंटों लाइन में लगे हुए हैं. बच्चे-महिलाएं बेबस हैं.

संकट के महत्वपूर्ण कारक

किसी देश के पास विदेशी मुद्रा की कमी का मतलब है, कि उस देश के पास आवश्यक वस्तुओं को खरीदने (आयात) के लिए पैसे नहीं हैं. श्रीलंका अपने आयात पर बहुत अधिक निर्भर है और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, वह पेट्रोलियम, भोजन, कागज, चीनी, दाल, दवाएं और परिवहन उपकरण भी आयात करता है. श्रीलंका के लिए आयात इतना आवश्यक है, कि सरकार को लाखों स्कूली छात्रों के लिए परीक्षा रद्द करनी पड़ी, क्योंकि उसके पास कागज की छपाई खत्म हो गई थी.

आज श्रीलंका जिस आर्थिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है, वह विदेशी मुद्रा की कमी के कारण है. हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने स्वीकार किया था, कि देश को 10 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है.

जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

31 मार्च को सोशल मीडिया पर श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग तेज हुई. हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए. अगले ही दिन, राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी. 2 अप्रैल को श्रीलंका में 36 घंटों का कर्फ्यू लगा दिया गया. इसके बाद, धीरे-धीरे देश के हालात बिगड़ते गए. 9 अप्रैल को एक बार फिर से हज़ारों की संख्या में लोग राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग के लिए सड़कों पर उतर आए. 10 अप्रैल को श्रीलंका के डॉक्टरों ने देश में कम हो रही दवाइयों के बारे में बताया. वहीं 6 मई को हजारों की संख्या में दुकानें, स्कूल बंद हो गए. देश में व्यापारियों ने हड़ताल की घोषणा कर दी. 9 मई को श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया.

Related Stories

No stories found.
हिंदुस्तान रीड्स
www.hindustanreads.com