महाराष्ट्र में मची सियासी हलचल, क्या 40 के आंकड़े के साथ बचेगी उद्धव की कुर्सी ?

महाराष्ट्र में मची सियासी हलचल, क्या 40 के आंकड़े के साथ बचेगी उद्धव की कुर्सी ?

महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव के बाद, महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच गई है. महाराष्ट्र विधान परिषद में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद, शिवसेना (Shiv Sena) के सीनियर नेता और मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पार्टी के 29 विधायकों के साथ कल ‘आउट ऑफ़ रीच’ हो गए थे.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एकनाथ शिंदे पार्टी के 40 विधायकों के साथ पहले गुजरात के सूरत और आज गुवाहाटी पहुंचे हैं. उन्होंने अपनी सियासी मजबूती का दावा भी किया है. इसी के साथ, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. इसलिए, आज दोपहर 1 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है. जिसमें ये निर्धारित हो जायेगा, कि सीएम उद्धव ठाकरे की कुर्सी बचेगी या उनकी सरकार गिर जाएगी.

शिंदे ने रखी शर्त

कल, यानी मंगलवार को इस मामले से सम्बंधित कई बैठकें हुईं. शिवसेना ने मिलिंद नार्वेकर (Milind Narvekar) और रविंद्र पाठक (Ravindra Pathak) को शिंदे और अन्य विधायकों से मिलने गुजरात भेजा था. 2 घंटे चली इस बैठक के बाद, मिलिंद नार्वेकर ने शिंदे की उद्धव ठाकरे से करवाई. तब शिंदे ने अपनी शर्त रखी, कि अगर उद्धव बीजेपी (BJP) के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं, तो पार्टी नहीं टूटेगी.

मंगलवार की शाम को उद्धव ठाकरे के घर पर महा विकास अघाड़ी (MVA) की बैठक हुई और बैठक में शामिल सभी विधायकों को वर्ली के होटल में भेज दिया गया. इसी बैठक में आज होने वाली 1 बजे की कैबिनेट मीटिंग तय की गई.

क्या है आंकड़ों का खेल

महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 सदस्य हैं. सरकार बनाने के लिए 145 विधायक होने चाहिए. आपकी जानकारी के लिए बता दें, शिवसेना के एक विधायक के निधन के बाद, अब 287 विधायक बचे हैं और सरकार बनाने के लिए शिवसेना को 144 विधायक की ज़रूरत है. पार्टी में आयी फूट के पहले, शिवसेना की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी के 169 विधायकों का समर्थन था, जबकि बीजेपी के पास 113 विधायक और विपक्ष के पास 5 अन्य विधायक हैं.

उद्धव को शिंदे पर है भरोसा

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को पूरा भरोसा है कि उनके सभी विधायक उनके पास होंगे और शिंदे भी उनकी बात मानेंगे. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे से हुई वार्ता के बाद उन्होंने कहा कि बीजेपी, शिवसेना और उनके कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है. शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन नहीं हो सकता है.

आपको बता दें, ये पहली बार नहीं है कि शिवसेना में फूट पड़ी है. 1990 में भी जब शिवसेना में बगावत हुई थी, तो छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) समेत 18 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया गया था. 2005 में भी खबर आयी थी, कि नारायण राणे (Narayan Rane) ने 40 विधायकों के साथ अलग होने की कोशिश की थी, पर वे उस समय कामयाब नहीं हो पाए थे. ये तीसरी बार है, जब किसी बड़े नेता ने बगावत की है.

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