Russia-Ukraine Crisis: रूस हुआ यूएनएचआरसी से बाहर, भारत ने वोट से किया परहेज़

Russia-Ukraine Crisis: रूस हुआ यूएनएचआरसी से बाहर, भारत ने वोट से किया परहेज़

पूरे विश्वभर में रूस (Russia) द्वारा यूक्रेन (Ukraine) पर किए गए हमले की निंदा की जा रही है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) को कई देशों एवं लोगों की निंदाओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यूक्रेन-रूस (Russia-Ukraine) के बीच जारी जंग के साथ ही रूस को कल गुरुवार, 6 अप्रैल को एक बड़ा झटका लगा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक प्रस्ताव रखा था. यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से रूस को निलंबित करने के लिए था. 193 सदस्यीय महासभा में इस प्रस्ताव के पक्ष में 93 मत पड़े, जबकि भारत सहित 58 देशों ने इस प्रस्ताव पर वोट से परहेज किया. वहीं, ‘मानवाधिकार परिषद में रूसी संघ की सदस्यता के निलंबन अधिकार’ शीर्षक वाले प्रस्ताव के खिलाफ 24 मत पड़े और ऐसे में प्रस्ताव पारित हो गया था. यूक्रेन-रूस जंग के दौरान, रूसी सेनाओं द्वारा यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) के पास आम लोगों की हत्या करने के आरोपों के चलते अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव रखा था.

भारत ने एक बार फिर दिया गुट-निरपेक्षता का सबूत

भारत आज़ादी के समय से ही गुट-निरपेक्ष की नीति का पालन करता आया है. अपनी इसी नीति का पालन करते हुए भारत ने रूस के खिलाफ वोट देने से परहेज किया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति (T. S. Trimurti ) ने यूएनजीए में वोटिंग के बाद कहा, “भारत ने आज महासभा में रूस महासंघ को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने से संबंधित प्रस्ताव पर वोट नहीं किया. हमने तर्कसंगत और प्रक्रिया सम्मत कारणों से ऐसा किया है”. टी एस तिरुमूर्ति ने कहा, कि “यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक, भारत शांति, संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है. हमारा मानना है, कि रक्त बहाने और निर्दोष लोगों के प्राण लेने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. यदि भारत ने कोई पक्ष लिया है, तो वह है शांति, हिंसा का तत्काल अंत”.

भारत ने कुछ रणनीतिक अनिवार्यताओं के करण रूस के खिलाफ वोट देने वाले प्रस्ताव से दूरी बना ली. अगर भारत ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया होता, तो भारत मानवाधिकारों के उल्लंघन और मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के लिए पश्चिमी दृष्टिकोण को बाहर कर सकता था. वहीं, भारत अगर इस प्रस्ताव पर वोट करता, तो उसका संबंध पश्चिमी देशों से पूरी तरह टूट सकता था. इसके साथ ही, यह भारत द्वारा दिए जा रहे मानवाधिकारों के समर्थन के खिलाफ होता. वहीं, अमेरिकी इतिहास पर नज़र डालें, तो अमेरिका ने अक्सर उन देशों को दंडित करने के लिए मानवाधिकारों का इस्तेमाल किया है, जिनसे वह मित्रतापूर्ण संबंध नहीं रखता.

क्या अब रूस करेगा यूक्रेन पर पलटवार

आपको बता दें, कि रूसी सैनिकों द्वारा यूक्रेन के बुचा शहर में की गई नागरिकों की हत्याओं की तस्वीरें एवं वीडियो सामने आने के बाद, अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड (Linda Thomas‑Green Field) ने 47 सदस्यीय मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने का अभियान शुरू किया था. इस अभियान में अब वह सफल भी हो चुका है. प्राप्त खबरों के अनुसार, रूसी सैनिक यूक्रेन के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र डोनबास में बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहे हैं. उल्लेखनीय है, कि रूस दूसरा देश है, जिसकी यूएनएचआरसी सदस्यता छीन ली गई है. महासभा ने साल 2011 में लीबिया को परिषद से निलंबित कर दिया था.

Related Stories

No stories found.
हिंदुस्तान रीड्स
www.hindustanreads.com