राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) हत्याकांड के दोषी, ए.जी. पेरारिवलन (A.G. Perarivalan) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिल गई है. बुधवार, 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा करने के आदेश दिये. आपको बता दें, कि ए.जी. पेरारिवलन पिछले 31 सालों से जेल में बंद थे. वहीं अपनी रिहाई में होनी वाली देरी को लेकर, पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी डाली थी.

जस्टिस एल नागेश्वर की बेंच ने आर्टिकल 142 (Article 142) का इस्तेमाल करते हुए, ए.जी. पेरारिवलन को रिहा करने के आदेश दिये हैं. वहीं जेल में अच्छे बर्ताव को देखते हुए, अदालत ने उन्हें रिहा करने का फैसला सुनाया है. बेंच ने कहा, कि “राज्य मंत्रिमंडल ने विचार-विमर्श के आधार पर अपना फैसला किया था. अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, दोषी को रिहा किया जाना उचित होगा.” आपको बता दें , कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को विशेषाधिकार देता है, जिसके तहत संबंधित मामले में कोई अन्य कानून लागू न होने तक, उसका फैसला सर्वोपरि माना जाता है.

आपको बता दें, कि साल 2018 में तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट से ए.जी. पेरारिवलन को रिहा करने की सिफारिश की थी. मगर यह मामला, कानूनी दांव पेंच में फंस गया था. इसी में देरी के चलते, ए.जी. पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट से सज़ा में राहत देने की माँग की थी.

इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे ए.जी. पेरारिवलन को, सुप्रीम कोर्ट ने यह देखते हुए 9 मार्च को ज़मानत दी थी, कि सज़ा काटने और पैरोल के दौरान उनके व्यवहार को लेकर, किसी तरह की शिकायत नहीं मिली थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि 47 साल के पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था. इसमें यह मांग की गई थी, कि जब तक ‘मल्टी डिसिप्लीनरी मॉनिटरिंग एजेंसी’ (MDMA) जांच कर रही है, तब तक उनकी उम्रकैद की सज़ा को रोक दिया जाए.

गौरतलब है, कि 21 मई, 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक जनसभा के दौरान हत्या कर दी गई थी. इसके बाद, 11 जून, 1991 को ए.जी. पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था. यह एक आत्मघाती हमला था, जिसमें पेरारिवलन समेत 7 लोगों को दोषी पाया गया था. वहीं टाडा कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन को मौत की सज़ा सुनाई थी. बाद में दया याचिका की वजह से, पेरारिवलन की मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया गया था.

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