Narendra Modi Speech: संसद में कांग्रेस पर साधा निशाना, यूपीए काल से की महंगाई की तुलना

Narendra Modi Speech: संसद में कांग्रेस पर साधा निशाना, यूपीए काल से की महंगाई की तुलना

Union Budget 2022 को पेश हुए 7 दिन बीत चुके हैं. वहीं आज प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्यसभा में राष्ट्रपति Ram Nath Kovind के अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव दिया है. उन्होंने इससे पहले सोमवार को भी लोकसभा में इस अभिभाषण का जवाब दिया था. प्रधानमंत्री के इस धन्यवाद प्रस्ताव से पहले, सुबह 9:20 पर राज्यसभा की बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी की एक बैठक भी हुई थी.

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्रपति Ram Nath Kovind के अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए कहा, कि “देश में आने वाले 25 सालों में समृद्धि कैसे बढ़ेगी, इस पर हम सबको मिलकर काम करना होगा. जब भारत में कोरोना की शुरुआत हुई थी, तब ऐसा लग रहा था कि भारत का भविष्य डूब जाएगा. इस बात पर पूरे विश्व में काफी चर्चा भी हुई थी, क्योंकि इस महामारी का पूरे विश्व पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. मगर भारत ने 130 करोड़ लोगों की इच्छाशक्ति और अनुशासन के दम पर, इस महामारी को हरा दिया. इस प्रयास के लिए दुनिया भर में भारत की सराहना हुई है.”

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में यह भी कहा, कि कोरोना काल में केंद्र सरकार ने लगभग 80 करोड़ से भी ज़्यादा देशवासियों को मुफ्त राशन मुहैया करवाकर, दुनिया के सामने भारत के अन्नदाता होने की पहचान प्रस्तुत की है. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार द्वारा 5 करोड़ ग्रामीणों को स्वच्छ पीने का पानी भी प्रदान किया गया है.

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आज राज्यसभा में कांग्रेस काल के दौरान महंगाई और मौजूदा समय की महंगाई की तुलना भी की. उन्होंने कहा, कि “यूपीए काल से महंगाई की तुलना करें, तो पता चलेगा कि महंगाई क्या होती है. यूपीए काल में महंगाई का अंकड़ा दस गुना था. अगर अमेरिका से तुलना करें, तो भारत में महंगाई बहुत कम है. हमने महंगाई को कम करने का हर संभव प्रयास किया है.”

राज्यसभा में दिए अपने धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सदन के कुछ निराशाजनक पहलुओं को भी उठाया. उन्होंने कहा कि, "भारत के कुछ सांसद सदन में भारत की निराशाजनक तस्वीर पेश करना चाह रहे हैं. ऐसा लग रहा है, यह करके उन्हें आनंद आ रहा है. मुझे लगता है, कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, हार जीत होती रहती है, लेकिन किसी भी राजनेता को अपनी निजी हार को देश के माथे पर नहीं थोपना चाहिए."

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