कहीं अर्थव्यवस्था ठप तो कहीं राजनीतिक बवाल, पड़ोसी देशों के संकट का क्या होगा भारत पर असर?

कहीं अर्थव्यवस्था ठप तो कहीं राजनीतिक बवाल, पड़ोसी देशों के संकट का क्या होगा भारत पर असर?

कोरोना महामारी के विश्व में पैर पसारने के साथ ही, कई देश आर्थिक और राजनीतिक संकट से घिरें नज़र आ रहे हैं. इसमें भारत के कुछ पड़ोसी देश जैसे श्रीलंका और पाकिस्तान भी शामिल हैं. जहां एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच कई दिनों से युद्ध चल रहा है. तो वहीं दूसरी ओर श्रीलंका में आर्थिक स्थिति, तो पाकिस्तान में सियासी घमासान देखा गया. यह संकट वैसे तो पड़ोसी देशों में देखे जा रहे हैं, मगर इसका अच्छा और बुरा प्रभाव भारत पर भी दिख सकता है .

भारत बना मददगार

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका इस समय आर्थिक रूप से काफ़ी बुरी परिस्थितियों का सामना कर रहा है. वहीं देश में खाने के भी लाले पड़ रहे, तो महंगाई भी आसमान को छू रही है. फ़िलहाल तो ऐसा है, कि दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजों के लिए भी लोगों को घंटो लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है. स्थिति ये हो गई है, कि श्रीलंकाई सरकार ने देश में आपातकाल तक लागू कर दिया था. हालांकि, अब इसे हटा लिया गया है, मगर फिर भी स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है.

ऐसे में भारत ने पड़ोसी होने का फर्ज़ अदा करते हुए, श्रीलंका को कई तरह की सहायता प्रदान की है. भारत ने श्रीलंका को 1अरब डॉलर की अतिरिक्त क्रेडिट लाइन सहायता और 2,70,000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की है. इसके अलावा, भारत ने 3 लाख टन चावल भी देने का वादा किया है. हालांकि, इस संकट से भारत पर भी असर दिखाई दे सकता है. मगर मदद के लिए भारत के बढ़े हाथ और श्रीलंका की चीन से बढ़ती दूरी, भारत के लिए वैश्विक स्तर पर फायदेमंद साबित हो सकती है.

पाकिस्तान में सियासी उथल पुथल

श्रीलंका के अलावा भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सियासी उथल-पुथल मची हुई है. कई दिनों से चल रहे इस सियासी घटनाक्रम के बीच, फ़िलहाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ़ नेशनल असेंबली में विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था. मगर इमरान खान ने आर्टिकल 5 का सहारा लेते हुए न सिर्फ इसे खारिज किया, बल्कि नेशनल असेंबली को भी भंग कर दिया था.

वहीं अब पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान सरकार को ज़ोरदार झटका देते हुए, अविश्वास प्रस्ताव को सही ठहराया और 9 अप्रैल को 10 बजे तक वोटिंग कराने का आदेश दिया है.

ऐसा माना जा रहा है, कि पाकिस्तान में मचे इस सियासी संकट से भारत को काफ़ी बड़ा फ़ायदा देखने को मिला है. दरअसल, इस घटनाक्रम से पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों पर काफ़ी असर हुआ है. इसके साथ ही, पाकिस्तान इस वक़्त पश्चिमी देशों से अलग-थलग नज़र आ रहा है, जो भारत के लिए कूटनीतिक तौर पर अच्छा माना जा सकता है.

भारत का न्यूट्रल रवैया

रूस और यूक्रेन के युद्ध ने न सिर्फ इन दोनों देशों को, बल्कि पूरे विश्व को अपने लपेटे में ले रखा है. जहां रूस पर लगाम कसने के लिए विश्व के कई देशों और संगठनों ने उस पर कई तरह के आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाएं हैं. मगर भारत ने अभी तक किसी भी देश का एकतरफा समर्थन करने से इंकार कर दिया है. भारत ने कई मंचो पर कहा, कि “वह शांति और अहिंसा के साथ है.”

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस को, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से बेदखल करने के लिए वोटिंग की गई थी. इसमें भारत ने शांति की बात करते हुए वोटिंग करने से मना कर दिया था. आपको बता दें, कि इससे पहले भी कई मौकों पर भारत रूस के खिलाफ़ वोट देने से मना कर चुका है.

अमेरिका की भारत को चेतावनी

रूस और यूक्रेन विवाद के बीच भारत के न्यूट्रल रवैये से अमेरिका काफ़ी खफ़ा नज़र आ रहा है. वहीं इसको लेकर अमेरिका ने इशारों ही इशारों में कई बार चेतावनी भी दी. दरअसल, इस युद्ध के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) भारत की यात्रा पर आए थे. इस दौरान अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी, कि भारत रूस से तेल खरीदी को लेकर कोई डील न करे. मगर भारत ने रूस से भारी छूट के साथ तेल खरीदी की डील को जारी रखा.

राहुल गांधी की चेतावनी

देश में बढ़ती मंहगाई के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, कि “समय रहते अगर स्थिति को नहीं संभाला गया, तो भारत की हालत भी श्रीलंका जैसी हो जाएगी. सरकार अपनी नाकामियों को छुपा रही है, लेकिन 2-3 साल रुको यह सब बाहर आ जाएगा.”

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