National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस, 8 जून को होगी पूछताछ

National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस, 8 जून को होगी पूछताछ

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से बुधवार 1 जून को बड़ी कार्यवाही की गई है. इस दौरान, नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस भेजा. तो वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, कि केंद्र सरकार बदले की भावना में अंधी हो गई है और हमें डराया जा रहा, मगर हम डरेंगे नहीं. इसके साथ ही, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और रणदीप सुरजेवाला ने प्रेसवार्ता कर के बताया, कि ईडी ने सोनिया गांधी को 8 जून को पूछताछ के लिए बुलाया है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, कि साल 1942 में नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया गया था, उस समय अंग्रेजों ने इसे दबाने की कोशिश की थी. वहीं आज मोदी सरकार भी यही कर रही है और इसके लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा. उन्होंने बताया, कि ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस भेजा है. कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया, कि मोदी सरकार उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है.

नोटिस जारी होने पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, कि अगर वह (सोनिया और राहुल गांधी) यहां रहेंगे तो ईडी के सामने जरूर पेश होंगे, नहीं तो अगली तारीख की मांग करेंगे. आइए जानते हैं, कि आखिर क्या है नेशनल हेराल्ड का ये मामला? और इसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी कैसे फंस गए?

क्या है नेशनल हेराल्ड?

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने, 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) का गठन किया था, जिसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था. तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज़ समाचार पत्र प्रकाशित किये गए.

भले ही AJL के गठन में जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इस पर उनका मालिकाना हक नहीं था. वहीं इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और इसके शेयर होल्डर भी वही थे. 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे और साल 2008 आते-आते, इस पर 90 करोड़ रूपए से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया. तब AJL ने फैसला किया, कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा और तब कंपनी, प्रॉपर्टी बिजनेस में उतर गई.

तो विवाद कहां से शुरू हुआ?

साल 2010 में AJL के 1057 शेयरधारक थे और घाटा होने पर, इसकी होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड (YIL_ को ट्रांसफर कर दी गई. यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना उसी वर्ष यानी साल 2010 में हुई थी और इसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव, राहुल गांधी डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए थे. गौरतलब है, कि कंपनी में 76% हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के पास रखी गई. वहीं शेष 24% कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास थी.

मौजूदा रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेयर ट्रांसफर होते ही AJL के शेयर होल्डर्स सामने आ गए. पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया, कि जब YIL ने AJL का ‘अधिग्रहण' किया था, तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था. इतना ही नहीं, शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई.

दर्ज हुआ मामला

साल 2012 में भाजपा के नेता और देश के नामी वकील, सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ़ मामला दर्ज कराया था. उस वक़्त केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी. सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया, कि YIL ने 2,000 करोड़ रूपए से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए ‘गलत’ तरीके से बंद पड़े प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को ‘अधिग्रहित’ किया था.

स्वामी ने यह भी आरोप लगाया, कि YIL ने 90.25 करोड़ रूपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए, सिर्फ 50 लाख रुरूपए का भुगतान किया था, जो AJL पर कांग्रेस पार्टी का बकाया था. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया, कि AJL को दिया गया कर्ज ‘अवैध’ था, क्योंकि यह पार्टी के फंड से लिया गया था.

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