Delhi Violence 2020: गांधी परिवार और कपिल मिश्रा समेत कई बड़ी हस्तियों के नाम जारी हुआ नया नोटिस

Delhi Violence 2020: गांधी परिवार और कपिल मिश्रा समेत कई बड़ी हस्तियों के नाम जारी हुआ नया नोटिस

दिल्ली हिंसा 2020(Delhi Violence 2020) के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज ही बहुत से दिग्गज नेताओं और समाजसेवियों को नोटिस जारी किया है. इनमें मुख्य नाम सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra), राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और भारतीय जनता पार्टी (BJP)के नेता अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur), प्रवेश साहिब वर्मा (Parvesh Sahib Verma), कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) का है.

दिल्ली हिंसा 2020 के मामले में जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल (Siddharth Mridul) और जस्टिस रजनीश भटनागर (Rajneesh Bhatnagar) की एक बेंच ने इन राजनेताओं के कथित घृणास्पद भाषणों के लिए FIR दर्ज करने वाले याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई याचिका की वजह से नोटिस जारी किया है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने नए संशोधित पक्षों को आरोपी के रूप में बुलाने के लिए वकीलों द्वारा की गई कार्यवाही पर थोड़ी नाराज़गी भी जाहिर की है. इसके लिए उन्होंने कहा, कि जो लोग कोर्ट में पेश किए गए हैं, उनको आरोपी कहना ठीक नहीं, वह सिर्फ प्रस्तावित प्रतिवादी हैं.

दिल्ली हिंसा 2020 के मामले में हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia), अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) ,अकबरुद्दीन ओवैसी (Akbaruddin Owaisi), वारिस पठान (Waris Pathan)और हर्ष मंदर (Harsh Mander)को भी नोटिस जारी किया है. इस मामले में अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2022 को होनी तय हुई है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि वर्ष 2020 में दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में जबरदस्त हिंसा हुई थी. इस दौरान बहुत से नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नफरत फैलाने वाले भाषणों को लेकर कोर्ट में बहुत सी याचिकाएं भी दायर की गई थी. कोर्ट इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. नागरिकता संशोधन अधिनियम तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लागू करने के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद, यह हिंसक माहौल उत्पन्न हुआ था.

इस सारे मामले में एक याचिकाकर्ता ने बताया, कि वर्ष 2020 में दिल्ली में हिंसा रात के समय नहीं हुई थी, बल्कि यह उस समय हुई थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भारत के दौरे पर थे. इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे इसमें शामिल थे. साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी इस मामले में अपना योगदान डालने की अपील की है. उनका कहना है, कि ऐसे दंगों में फंडिंग के लिए पीएफआई काम करता है तथा राष्ट्र विरोधी संगठनों का समर्थन भी करता है.

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