Russia-Ukraine Conflict: क्या है विवाद की जड़ और क्यों हुआ जंग का ऐलान?

Russia-Ukraine Conflict: क्या है विवाद की जड़ और क्यों हुआ जंग का ऐलान?

कई दिनों के भारी तनाव और आशंकाओं के बाद आखिरकार, Russia और Ukraine के बीच युद्ध छिड़ ही गया. वहीं इस युद्ध ने इन दो देशों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध के हालात पैदा कर दिए हैं. गौरतलब है, कि रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने किसी भी चेतावनी पर ध्यान दिए बगैर, पूरे दमखम के साथ Ukraine में सेना भेज दी और कई इलाकों के जोरदार हमला किया है.

वहीं, Ukraine ने भी अपने बचाव में पूरे दम-खम के साथ सैन्य कार्यवाही की है. मगर अब सवाल ये उठता है, कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई, कि दोनों पड़ोसी देशों ने एक दूसरे के खिलाफ़ जंग का ऐलान कर दिया. वहीं सोवियत संघ के जमाने में मित्र रहे ये दोनों देश, अब एक दूसरे के दुश्मन क्यों बन गए हैं? ऐसा माना जा रहा है, कि वैसे तो इस युद्ध के कई छोटे-छोटे कारण हो सकते हैं, लेकिन इस युद्ध की असल वजह उत्तर अटालांटिक संधि संगठन (नाटो) है.

क्या है NATO?

साल 1945 में दूसरा विश्वयुद्ध ख़त्म होने के बाद, सोवियत संघ की विस्तारवादी नीति कायम रही थी. वहीं सोवियत संघ की बढ़ती ताकतो को रोकने के लिए अमेरिका ने, वर्ष 1949 में 12 देशों का एक समूह यानी ‘नाटो’ बनाया. समय के साथ धीरे-धीरे इसमें सदस्य बढ़ते गए और आज इसमें, कुल 30 देश सदस्य हैं. आपको बता दें, कि 'नाटो' एक सैन्य गठबंधन है और इसका उद्देश्य, साथ मिलकर सुरक्षा नीति पर काम करना है.

Russia को ‘नाटो' नापसंद क्यों?

दरअसल, दूसरा विश्व खत्म होने के बाद दुनिया में सोवियत संघ और अमेरिका दो सुपर पावर थे. वहीं जब सोवियत संघ टूट गया और 15 नए देश बने, तो इनमें से अधिकतर देश ‘नाटो’ में शामिल होते गए. वहीं साल 2008 में, Georgia और Ukraine को भी ‘नाटो’ में शामिल होने का न्योता मिला. मगर पड़ोसी राष्ट्र Russia ने ऐसा होने नहीं दिया.

ऐसा माना जाता है, कि Russia के मन में ये विचार है, कि अगर Ukraine नाटो में शामिल होता है, तो उसकी सैन्य ताकत काफ़ी अधिक मात्रा में बढ़ जाएगी. बस इसी बात को लेकर, Vladimir Putin कई बार आपत्ति जता चुके हैं. गौरतलब है, कि रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin कई बार खुले आम ‘नाटो’ के विस्तार को लेकर आपत्ति जता चुके हैं.

Russia-Ukraine मामला

सुरक्षा जानकारों के अनुसार, दरअसल Ukraine की सैन्य ताकत Russia के मुकाबले काफ़ी कम है. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पास तकरीबन 8.5 लाख सैनिक हैं, तो Ukraine के पास महज 2 लाख सैनिक हैं. दोनों देशों के रक्षा बजट में भी बहुत ज्यादा अंतर है. ऐसे में Ukraine को Russia से खतरा महसूस होने लगा. इसलिए उसने अपनी आज़ादी बरकरार रखने लिए, ‘नाटो’ में शामिल होना उचित माना.

वहीं दोनों देश अपनी अपनी बात को लेकर अड़े हैं. जहां Russia ने ‘नाटो’ के विस्तार पर आपत्ति जताई, तो वहीं Ukraine ने इसमेंमें शामिल होने की इच्छा जताई. यह भी एक बड़ी वजह है, कि आज दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालत बन गए हैं.

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