Yadadri Temple: 1800 करोड़ में बना ये मंदिर, बनेगा विश्वस्तरीय अध्यात्मिक केंद्र

Yadadri Temple: 1800 करोड़ में बना ये मंदिर, बनेगा विश्वस्तरीय अध्यात्मिक केंद्र

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (K Chandrasekhar Rao) सोमवार को यादाद्री भुवनागिरी जिले के, श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में 'महाकुंभ संरक्षण' समारोह में शामिल हुए. वहीं चंद्रशेखर राव अपने परिवार के साथ यादाद्री मंदिर (Yadadri Temple) भी पहुंचे. इस समारोह में विधान परिषद अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, कई सांसद, विधायक, सचेतक और एमएलसी मौजूद थे.

आपको बता दें, कि अधिकारियों द्वारा 'महाकुंभ संरक्षण' के आयोजन के लिए काफ़ी व्यापक व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही, अधिकारियों को पहले ही सोमवार को मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद थी, इसलिए उनके द्वारा पहले से ही सभी ज़रूरी इंतजाम किए गए थे.

गौरतलब है, कि यादाद्री मंदिर की वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति का निर्माण 2,50,000 टन काले ग्रेनाइट से किया गया है. वहीं मंदिर, वास्तुकला की द्रविड़ और काकतीय शैली दोनों का एक संलयन प्रदर्शित करता है. पिछले साढ़े पांच साल में 1,280 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया. इसके साथ ही, 2000 से अधिक मूर्तिकार और हज़ारों श्रमिक पुनर्निर्माण कार्य में लगे हुए हैं, जो अभी भी प्रगति पर है.

दरअसल मंदिर गोपुरम में 125 किलोग्राम सोने से ढका हुआ है. चेन्नई की एक कंपनी, स्मार्ट क्रिएशंस ने यह कलश बनाए हैं, जिनकी 50 साल की वारंटी है. यह कलश नैनो टेक गोल्ड डिपोजिशन तकनीक से बने हैं, जो सोने की कम खपत करता है. इसकी ख़ासियत यह है, कि यह लगभग 5 ग्राम प्रति वर्ग फुट के उपयोग को कम करके परियोजनाओं की सामर्थ्य को बढ़ाता है.

वहीं यादाद्री मंदिर के मुख्य वास्तुकार आनंद साईं का कहना है, कि “मंदिर का भूतल लगभग 11 एकड़ से बढ़ाकर 17 एकड़ कर दिया गया है. इसी वजह से यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर बन चुका है.” आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि धार्मिक कृति का निर्माण 2500000 टन काले ग्रेनाइट से किया गया है. वहीं मंदिर अपनी वास्तुकला और सुरुचिपूर्ण भव्यता के कारण अपने बेहतरीन मिश्रण के साथ खड़ा है. माना जा रहा है, कि यह मंदिर अपनी भव्यता की वजह से इस समय तेलंगना की शान बन चुका है.

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