World Inequality Report 2022: भारत गरीबी की ओर अग्रसर, जानिए क्या हैं इस रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

World Inequality Report 2022: भारत गरीबी की ओर अग्रसर, जानिए क्या हैं इस रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

हाल ही में जारी हुई World Inequality Report 2022 के अनुसार, भारत आय की असमानता के मामले में दुनिया में अव्वल देशों में शुमार है. आपको बता दें, कि यह रिपोर्ट फ्रांस में स्थित World Inequality Lab के द्वारा जारी की गई है. इस रिपोर्ट का उद्देश्य वैश्विक असमानता और गतिशीलता पर अनुसंधान को बढ़ावा देना है. यह रिपोर्ट वैश्विक असमानताओं को मापने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधानों के प्रयासों की नवीनतम  जानकारी प्रदान करती है. 

World Inequality Report 2022 के अनुसार, विश्व के शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास साल 2021 में दुनिया की कुल संपत्ति का 76 फीसदी हिस्सा था. इसके साथ ही, निचले क्रम के 50 फीसदी लोगों की कुल संपत्ति का महज 2 फीसदी हिस्सेदारी थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि शीर्ष 10 फीसदी लोगों की आय, दुनिया की कुल आय का 52 फीसदी हिस्सा थी. साल 2021 में विश्व के 6.22 करोड़ लोगों के पास (बाजार विनिमय दर के अनुसार) 7.5 करोड़ रुपये से अधिक का स्वामित्व था. वहीं, उनकी औसत संपत्ति 21 करोड़ रुपये थी, जो कुल 13.16 अरब रुपए का प्रतिनिधित्व करती थी. 

Source: World Inequality Report

 वहीं भारत की बात करें, तो देश की शीर्ष 1 फीसदी आबादी के पास साल 2021 में कुल औसत राष्ट्रीय आय का एक तिहाई हिस्सा है. इस 1 फीसदी आबादी की सालाना औसत आय 3.24 करोड़ रुपये है. वहीं भारत की आधी आबादी देश की कुल आय का सिर्फ 13.1 फीसदी हिस्सा ही कमाती है. प्रकाशित हुई रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा अपनाई गई आर्थिक सुधार और उदारीकरण की नीति से से अधिकांश तौर पर देश की शीर्ष 1 फीसदी आबादी को ही लाभ मिला है. इसके अलावा, देश की संपन्न 10 प्रतिशत आबादी, देश की कुल आय का 65 प्रतिशत भाग आय के रूप में अर्जित करती है.

Source: World Inequality Report

वहीं, भारत देश को रिपोर्ट में एक संपन्न अभिजात वर्ग के साथ एक गरीब और आय के मामले में असमानता वाले देश के रूप में चिन्हित किया गया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि भारत में 1 फीसदी सबसे अमीर लोगों के पास 2021 में कुल राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी हिस्सा है. वहीं, शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास आय का 57 फीसदी हिस्सा है. कार्यशक्ति क्षमता के आधार पर साल 2021 में भारतीय वयस्क आबादी की औसत राष्ट्रीय आय 2 लाख 4 हजार 200 रुपये है.

World Inequality Lab, द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार भारत का मध्यमवर्ग अपेक्षाकृत गरीब है, जिसकी औसत घरेलू संपत्ति केवल 7 लाख 23 हजार 930 रुपये है. World Inequality Report 2022 के अनुसार, भारत में कमाई के मामले में लैंगिक असमानताएं बहुत ज्यादा हैं. देश की कुल आय में महिला श्रम आय का हिस्सा, महज 18 फीसदी के बराबर है. यह आंकड़े एशिया के महिला श्रम आय के औसत से बेहद कम हैं. इसके साथ ही, यह हिस्सेदारी विश्व में राष्ट्रीय आय में महिलाओं की साझेदारी के मामले में सबसे कम हैं.

इसके साथ ही, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि आय और संपत्ति की असमानताएं 1980 के दशक के बाद से लगभग हर जगह ही बढ़ रही हैं. World Inequality Report 2022 के अनुसार, भारत में संपत्ति के असमान वितरण में थोड़ा सुधार देखने को मिला है. वर्ष 1980 की बात करें, तो वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 फीसदी सबसे अमीर लोगों की वैश्विक आय का हिस्सा 1820 और 2020 के बीच 52 फीसदी से 60 फीसदी के बीच रहा है. दूसरी ओर, आय के आधार पर निचले क्रम के 50 फीसदी लोगों  के पास आय का सिर्फ 10 फीसदी हिस्सा ही मौजूद है. जबकि, वर्ष 1990 के बीच शीर्ष 1 फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 38 फीसदी हिस्सा था. वहीं निचली 50 फीसदी आबादी के पास आय का 2 फीसदी हिस्सा था.

Source: World Inequality Report

World Inequality Report 2022 के आंकड़ों की मानें, तो विश्व के शीर्ष 10 देश 58 फीसदी कार्बन उत्सर्जन करते हैं. बाकी निचले 50 फीसदी देशों के द्वारा महज 12 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन किया जाता है.

Source: World Inequality Report

विश्व के अन्य देशों पर नज़र डालें, तो मध्य पूर्व देशों और उत्तरी अमेरिका की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 58 फीसदी हिस्सा मौजूद है. वहीं लैटिन अमेरिका की 55 फीसदी राष्ट्रीय आय का हिस्सा, सिर्फ शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास है. इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप के देशों की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय में 36 फीसदी भागीदारी है. 

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