Uttar Pradesh Women Safety: प्रदेश में कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं, और कितना सख्त है सुरक्षा घेरा

Uttar Pradesh Women Safety: प्रदेश में कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं, और कितना सख्त है सुरक्षा घेरा

देश भर में लगभग हर राज्य सरकार, महिला सुरक्षा को लेकर बड़े दावें पेश करती हैं. मगर आंकड़ों की बात आने पर, ये सभी दांवे फीकें पड़ जाते हैं. एक अनुमान के अनुसार, देश में आज भी लगभग हर 2 मिनट में महिला अपराध का एक मामला दर्ज़ होता है. वहीं केवल Uttar Pradesh में ही, हर रोज़ करीब 135 से अधिक की संख्या में महिलाओं से जुड़े अपराधिक मामले दर्ज़ किए जाते  है. हालांकि, ये तो सिर्फ़ वो आंकड़ें है जो सरकारी कागज़ों में दर्ज़ हैं. 

महिला सुरक्षा के लिए काम कर रहे जानकारों के मुताबिक, महिलाओं से जुड़े काफ़ी मामले पीड़ित महिला तक ही दबे रह जाते है. इसके बावजूद, आज भी महिलाओं से सम्बंधित अपराधिक मामलों के आंकड़ों में ज्यादा कमी नहीं आई है. बात देश के सबसे बड़े राज्य Uttar Pradesh की करें, तो यहां भी महिला अपराध के कुछ ऐसे मामले देखें गए, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया.

महिला सुरक्षा को लेकर क्या कहते है आंकड़े 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, वर्ष 2020 में Uttar Pradesh में महिला अपराध के 49,385 मामलें दर्ज किए गए थे. जो कि महिला अपराधों के मामले में, Uttar Pradesh की स्थिति को संतोषजनक ना बताने की लिए काफ़ी है. हालांकि वर्ष 2020 में पिछले वर्ष 2019 के मुकाबले, 8-10% की गिरावट ज़रूर देखने को मिली है. आपको बता दें, कि वर्ष 2019 में महिलाओं की सुरक्षा और अपराध के समबन्ध में, कुल 59,853 मामलें दर्ज किए गए थें. वहीं वर्ष 2020 में, 10% की गिरावट के साथ यह आंकड़ा 49,385 पर पहुंचा था.   

Uttar Pradesh की इन घटनाओं से हिला पूरा  देश 

एनसीआरबी के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार,  Uttar Pradesh में महिला सुरक्षा मामलों में पिछले वर्ष के मुकाबलें फ़िलहाल काफ़ी राहत देखने को मिली है. एक समय हत्या और जघन्य अपराधों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले प्रदेश में, अपराधों की संख्या में कमी आना एक सुखद संकेत है. मगर इस राज्य में महिलाओं से सम्बंधित कुछ मामलों ने, बीते साल पुरे देश को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया था. एक नज़र Uttar Pradesh में हुए कुछ ऐसे मामलों पर-

1. उन्नाव रेप मामला

4 जून 2017 को, Uttar Pradesh के उन्नाव शहर में 17 वर्षीय एक लड़की सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई थी. यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब पीड़िता ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक, Kuldeep Sengar और उनके साथियों पर बलात्कार करने का आरोप लगाया. इस क्रम में आरोपियों पर कोई कार्यवाही नहीं होते देख, पीड़ित ने घटना के एक वर्ष बाद मुख्यमंत्री, Yogi Adityanath के घर के बाहर खुद को आग लगाने का भी प्रयास किया था. इस मामले को बढ़ता देख, राज्य की पुलिस ने कार्यवाही तो शुरू की. मगर इस दौरान, पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी. वहीं कुछ दिन बाद रेप पीड़िता भी, एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थी. इस हादसे में, पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई और वकील को भी काफ़ी गहरी चोट लगी. इस हादसे को, पीड़ित नाबालिग ने विधायक की साज़िश बताया था. जिसके बाद सरकार ने मामले की जांच सीबीआई के हाथों में सौंप दी. वहीं सीबीआई जांच के बाद अदालत ने, Kuldeep Sengar को बलात्कार और अपहरण के मामले में दोषी करार दिया था. इसके चलते, उन्हें अदालत की तरफ से आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई. 

2. हाथरस मामला

Uttar Pradesh के हाथरस जिले से, पिछले वर्ष 2020 में एक कथित बलात्कार का मामला सामने आया था, जो कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना. आपको बता दें, कि 14 सितंबर 2020 को हाथरस जिले में चार आरोपियों ने कथित तौर पर, एक दलित युवती का बलात्कार करके हत्या का प्रयास किया था. इस घटना के बाद, गंभीर हालत में पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 29 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया. पीड़ित युवती की मौत के बाद, इस बात की चर्चा हुई कि पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए, आधी रात को ही शव को जला दिया. इस ख़बर के फैलने के बाद, मामले ने ज़बरदस्त तूल पकड़ लिया और देश के कई राजनेताओं की भी इसमें एंट्री हो गई. इस दौरान, हाथरस को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया था. यहां तक, कि स्थानीय लोगों को भी अपना पहचान पत्र दिखाकर प्रवेश लेना पड़ रहा था. मामले को बढ़ता देखकर, इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. इसके बाद सीबीआई ने पीड़ित युवती के बयान को आधार बनाकर, चार आरोपियों को हिरासत में लिया था.

महिला सुरक्षा को लेकर Uttar Pradesh सरकार के सराहनीय कदम 

1. सेफ सिटी योजना 

दिल्ली में हुए निर्भया रेप मामले के बाद, केंद्र सरकार ने सेफ सिटी योजना की शुरुआत की थी, इसमें यूपी से लखनऊ शहर को इस योजना में शामिल किया था. वहीं Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री, Yogi Adityanath ने इस सेफ सिटी योजना में विस्तार करते हुए, राज्य के 17 और शहरों में इसे लागू किया है. इस विस्तार के लिए राज्य सरकार ने, वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में 97 करोड़ रूपए का प्रावधान भी किया था. इस योजना के तहत, जहां लाइट नहीं हो वहां लाइट के पूर्ण बंदोबस्त किए गए है. साथ ही, रात्रि में अकेली महिला को महिला पुलिसकर्मियों द्वारा यातायात की सुविधा भी दी जाती है.

2. मिशन शक्ति योजना

वर्तमान की योगी सरकार ने मिशन शक्ति योजना के तहत, पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की  शुरुआत की है. सरकार के मुताबिक़, पीड़ित महिला निसंकोच और खुल कर अपनी बात रख सके, इसलिए इस महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत की जा रही है. इसके अंतर्गत, राज्य के हर पुलिस थानों में हेल्प डेस्क पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है. महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला पुलिसकर्मी को ये जिम्मेदारी दी गई है, कि वो हर वक्त महिलाओं की मदद और सुरक्षा के लिए तैयार रहें. इसके अलावा, राज्य में महिलाओं के हित में कुछ और योजनाएं भी शामिल है, जैसे-

योजना उद्देश्य 
महिला सामर्थ्य योजना रोजगार के प्रति आर्थिक सशक्त के लिए 90 % अनुदान 
बैंक सखी योजना डिजिटल और बैंक सेवाओं के लिए 50000 की सहायता 
भाग्य लक्ष्मी योजना 50000 रुपयों की आर्थिक सहायता 
कन्या सुमंगला योजना पढाई के लिए 15,000 रुपयों की सहायता 
विधवा पेंशन योजना प्रति महीने 500 रुपयों की आर्थिक सहायता 

Uttar Pradesh में, वर्ष 2014 के मुकाबले अपराधों में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन पिछले दो वर्षों से अपराधों में काफ़ी कमी देखने को मिली. राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर महिला सुरक्षा को लेकर उठाए गए सख्त कदमों के बाद, अब महिलाओं से सम्बंधित अपराधों में भी गिरावट देखने को मिल रही है. हालांकि महिला सुरक्षा की बात की जाए, तो आज भी समाज़ और सरकारी तंत्र की इस पर स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है. 

इन कारणों से भी बढें महिलाओं के प्रति अपराध के आंकड़े 

1. ऐसा देखा जाता है कि कई पीड़ित महिलाएं और लड़कियां, सामाजिक प्रतिष्ठा और बदनामी के डर से भी अपराध के खिलाफ़ शिकायत दर्ज़ नहीं करवाती है. शिकायत दर्ज़ और कार्यवाही ना होने के कारण, कई बार अपराधियों का हौंसला बुलंद हो जाता है. हालांकि, इस बात कोई साक्ष्य या डाटा न होने की वजह से, ये बस एक संभावित वजह है.

2. महिला अपराध से जुडें मामलों में, साक्षरता भी अहम है. कुछ मामलों में ऐसा देखा गया है, कि सही जानकारी के आभाव में भी कई बार अपराधी आसानी से रिहा हो जाते है. साथ ही, पीड़ित को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

3. आंकड़ों पर नज़र डालें, तो देश की कई अदालतों में लाखों मामलें लंबित पड़े हैं. इसका मुख्या कारण है, न्यायिक व्यवस्था में होने वाली देरी. ये देरी, कई दफा पीड़ित परिवारों का हौंसला भी तोड़ देती है.

Uttar Pradesh के आंकड़ों के सहारे ऐसा देखा जा सकता है, कि देश में कड़े कानून होने के बावजूद भी, महिलाओं के प्रति अपराधों में लगातार उछाल देखने को मिल रही है. ऐसे में महिला सुरक्षा के लिए काम कर रहे जानकारों का कहना हैं, कि "बदलते माहौल में महिलाओ को सुरक्षित महसूस करवाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है". वहीं ऐसा देखा गया है, कि प्रचार प्रसार के द्वारा भी महिला सुरक्षा और संरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता एक अच्छा बदलाव है. 

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