Electric Cycle: क्या है भारत में इलेक्ट्रिक साइकिलों का भविष्य?

Electric Cycle: क्या है भारत में इलेक्ट्रिक साइकिलों का भविष्य?

भारत में Electric Cycle का व्यापार मुश्किलों में खड़ा नज़र आ रहा है. देश और दुनिया में साइकिल उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी, Hero के प्रमोटर एचएमसी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर, पवन मुंजाल का कहना है, की सरकारी नीतियों के कारण भारत में इलेक्ट्रॉनिक साइकिल कारोबारियों को आने वाले 5 वर्षों में तगड़ा झटका लग सकता है. विश्व में Electric Cycle का सबसे बड़ा बाज़ार यूरोपियन यूनियन है. यूरोपियन यूनियन के देशों में साइकिलों के व्यापार की कीमत, 5 बिलियन यूरो तय की गई है. भारत की तुलना में यह कीमत लगभग 50 गुना अधिक है. भारत में Electric Cycle निर्माताओं के व्यापार की योजनाओं में यूरोपियन यूनियन और यूनाइटेड किंग्डम की अहम भूमिका रहती है. आपको बता दें, कि भारत विश्व में इलेक्ट्रॉनिक साइकिल निर्माण के मामले में दूसरे स्थान पर है.

Electric Cycle व्यापारियों का संकट

भारत की साइकिल उत्पादन उद्योग, इस समय संघर्ष की स्थिति से जूझ रही है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने वाली अधिकतर पॉलिसियों का फायदा Electric Cycle निर्माताओं को नहीं मिल रहा है. उद्योग से जुड़े एक उच्च अधिकारी का कहना है, कि पॉलिसी निर्माण में हुई भारी चूक Electric Cycle निर्माताओं के व्यापार पर बहुत भारी पड़ सकती है. केंद्रीय सरकार द्वारा जारी की गई, FAME 2 और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीमों के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का प्रचार और उन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है. मगर इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए बनी योजनाओं में Electric Cycle को जगह नहीं मिली.

इसी का नतीजा है, कि 5 सालों में भारत का Electric Cycle उद्योग 10 हज़ार करोड़ रुपए की कीमत का आर्डर खो सकता है. यह कहना है Hero के प्रमोटर, पवन मुंजाल का.

भारत में Electric Cycle का भविष्य

आने वाले समय में भारत Electric Cycle निर्माण उद्योग का भविष्य बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करता है, कि भारत सरकार उसे अपने एजेंडे में कितनी जगह देती है. भारत के Electric Cycle उद्योग बहुत हद तक अब भी विदेशों में एक्सपोर्ट पर ही निर्भर है. इस समय अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चीन के उत्पादों के विरोध के चलते, भारतीय निर्माताओं के लिए एक नई उम्मीद का दरवाज़ा खुला है. भारत के Electric Cycle निर्माताओं को उम्मीद है, कि वह चीन के उत्पादों की जगह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ले सकते हैं. मगर इसके लिए यह ज़रूरी है, कि उन्हें भारत सरकार की नीतियों में जगह मिले और उनके व्यापार को प्रोत्साहन दिया जाए.

साइकिल उद्योग के लिए क्या है अच्छी खबर

इस वर्ष जून में चीन के उत्पादों से पांव पीछे खींचने के बाद यूरोपीय देशों ने भारत की Electric Cycle को बाहें खोलकर अपनाया है. Hero के प्रमोटर, पवन मुंजाल का कहना है, कि जून में निर्यात किए गए बैच का अच्छा प्रदर्शन बहुत ही उत्साहित करने वाला है. अगर भारत के Electric Cycle निर्माता, यूरोपीय बाज़ारों में अपनी पैठ बना लेते हैं, तो यह भारतीय इंडस्ट्री के लिए बहुत ही बड़ी जीत मानी जाएगी. साथ ही इससे, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में यह भी संदेश जाएगा, कि भारत चीन का मुकाबला करने के लिए तैयार है.

भारत में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की सफलता

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बाज़ार की कीमत सन 2020 में 5 बिलियन डॉलर आँकी गई थी. लेकिन भारत में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के प्रति बढ़ते हुए क्रेज़ को देखते हुए, सन 2026 में यह आंकड़ा 47 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके पीछे कई कारण शामिल हैं. सबसे पहले तो, सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण के रखरखाव के लिए पेट्रोल और डीज़ल वाहनों के बजाय इको फ्रेंडली वाहनों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया जा रहा है. इसी कोशिश में सरकार इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है. ऐसा करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं भी लाॅंच की गई हैं. इसके अलावा, देश के नागरिक भी पेट्रोल और डीज़ल की दिन-ब-दिन बढ़ती कीमतों से परेशान होकर, दूसरे विकल्पों की ओर देख रहे हैं. इस तलाश में इलेक्ट्रॉनिक वाहन एक बहुत ही बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं. इसका उदाहरण, अभी हाल ही में देखने को मिला जब Ola द्वारा लाॅंच किए गए S1 और S1 प्रो स्कूटर सीरीज़ ने ज़बरदस्त सफलता हासिल की और बिक्री के नए रिकॉर्ड कायम किए.

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