Violence Against Women: NFHS के सर्वेक्षण में सामने आई हैरानी वाली बात

Violence Against Women: NFHS के सर्वेक्षण में सामने आई हैरानी वाली बात

26 नवंबर को International Day for Elimination of Violence Against Women मनाया गया है. इस दिन को Violence Against Women को रोकने के उद्देश्य से बनाया जाता है और इसे मनाने की शुरुआत, वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी. मगर इसके बावजूद भी आज काफ़ी देशों में ना जाने कितने ऐसे ही मामले देखने को मिलेंगे, जिनमें महिलाएं घरेलू एवं सामाजिक हिंसा की शिकार होती है. इन हिंसा के मामलों में रेप, छेड़छाड़ करना, जबरन शादी करवाना, शादी के बाद जबरदस्ती संबंध बनाना आदि जैसे कुकृत्य भी शामिल है.

National Family Health Survey (NFHS) ने Violence Against Women के संदर्भ में एक सर्वेक्षण किया है. वहीं इस सर्वेक्षण को भारत के अलग-अलग हिस्सों में किया गया है. यहां हम जानते है, कि इस सर्वेक्षण से Violence Against Women को लेकर लोगों की सोच और राय क्या है?

सबसे पहले तो आपको ये जानना जरूरी है, कि इस सर्वेक्षण के अनुसार घरेलू शोषण को सही ठहराने के लिए सबसे आम कारणों में ससुराल वालों का अनादर करना, घर और बच्चों की उपेक्षा करना बताया गया है. घरेलू हिंसा को सही ठहराने वाली महिलाओं के प्रतिशत में आंध्र प्रदेश 83.6% के साथ सबसे आगे है. इसके बाद नंबर आता है कर्नाटक (76.9%), मणिपुर (65.9%) और केरल (52.4%) का. वहीं हिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा के पुरुषों में घरेलू दुर्व्यवहार की स्वीकृति सबसे कम थी, यहां केवल 14.2%, उत्तरदाताओं ने सहमति व्यक्त की.

वहीं जनवरी 2018 में जारी हुए, पूरे देश के लिए NFHS (2015-2016) के आंकड़ों में कहा गया था, कि सर्वेक्षण में शामिल 52% महिलाओं का मानना ​​है, कि पति के लिए अपनी पत्नी को पीटना उचित है.  वहीं केवल 42% पुरुष इससे सहमत थे. नवीनतम सर्वेक्षण में पता चला है, कि 18 राज्यों में, मणिपुर, गुजरात, नागालैंड, गोवा, बिहार, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, केरल और पश्चिम बंगाल में महिला उत्तरदाताओं ने 'ससुराल वालों का अनादर' करना  पिटाई को जायज़ ठहराने का मुख्य कारण है.

हाल ही में जारी हुए, NFHS के पांचवें दौर में पता चला है, कि राजधानी दिल्ली में गर्भवती विवाहित महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण और युवा महिलाओं पर यौन हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं. यह निष्कर्ष. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए थे. सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक Ranjana Kumari ने कहा है, कि पति-पत्नी की हिंसा में गिरावट से संबंधित निष्कर्ष महिला अधिकार संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के अनुभव के साथ नहीं बताए गए हैं. हालांकि, इन मामलों में महामारी के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि भी दर्ज की गई है.

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