Population Control Bill: उत्तर प्रदेश और असम के बाद, उत्तराखण्ड में भी लागू हो सकता है बिल!

Population Control Bill: उत्तर प्रदेश और असम के बाद, उत्तराखण्ड में भी लागू हो सकता है बिल!

भारत के भाजपा की सरकार वाले राज्यों में Population Control Bill अपनाने की नीति ने तेज़ी पकड़ ली है. उत्तर प्रदेश और असम के बाद,अब उत्तराखण्ड भी इस Population Control Bill के समर्थन में आ चुका है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अनुरोध पर उत्तराखण्ड सरकार ने एक ऐसे पैनल का गठन किया है, जो पहाड़ों में इस कानून को लागू करने के लिए सभी ज़रूरी काम करेगा.

RSS द्वारा यह सुझाव उत्तर प्रदेश और असम की तर्ज पर ही दिया गया था. RSS ने यह दावा भी किया था कि पिछले कुछ वर्षों में देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी में पर्याप्त वृद्धि हुई है. इसी वजह से नेताओं ने इस संबंध में उचित उपाय करने की मांग की है.

देहरादून में  पिछले बुधवार को भाजपा और RSS के मुख्य सचिवों द्वारा एक बैठक बुलाई गई. इस बैठक में बीएल संतोष, राज्य इकाई के प्रमुख मदन कौशिक और RSS के संयुक्त महासचिव डॉ कृष्ण गोपाल और अरुण कुमार शामिल हुए थे. उत्तराखंड सरकार भी Population Control Bill जैसा सख्त कानून लाने पर विचार कर रही है, जिसकी मांग निवासियों के बीच बढ़ती जा रही है.

Population Control Bill पर स्पष्टीकरण देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, "जो भी कानून राज्य और उसके लोगों के लिए अच्छा है, जैसे जनसंख्या नियंत्रण और भूमि कानून, उसे लागू किया जाएगा."

Population control Bill कम करेगा अर्थिक असमानताएं

भाजपा शासित असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी बढ़ती हुई जनसंख्या को असम में अल्पसंख्यक मुसलमानों के बीच आर्थिक असमानता और गरीबी का मूल कारण बताया. Population Control Bill पर सरमा ने कहा, "चार चापोरी के लगभग 1,000 युवाओं को जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर जागरूकता पर लगाया जाएगा. यह युवक गर्भ निरोधकों की आपूर्ति और इस्तेमाल पर जागरूकता पैदा करेंगे."

भू कानून भी हो सकता है लागू

उत्तराखण्ड सरकार सख्त भूमि कानून पर भी विचार कर रही है. पीछले कुछ समय से उत्तराखंड के लोग इस कानून को लेकर काफी उत्साहित हैं. इस कानून में लोगों को अपनी विरासती जमीनों को सही तरीके से इस्तेमाल का मौका मिलेगा. हालंकि इस कानून पर काफी संशोधन होते आ रहे हैं.

Related Stories

No stories found.
हिंदुस्तान रीड्स
www.hindustanreads.com