सुप्रीम कोर्ट में Subramanian Swamy की याचिका, Ram Setu को मिले ऐतिहासिक स्मारक का दर्जा

सुप्रीम कोर्ट में Subramanian Swamy की याचिका, Ram Setu को मिले ऐतिहासिक स्मारक का दर्जा

भारत के ऐतिहासिक स्थल Ram Setu को ऐतिहासिक स्मारक घोषित करने की मांग फिर से उठ चुकी है. यह मांग BJP नेता Subramanian Swamy द्वारा Supreme Court Of India में उठाई गई है. याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उनकी इस मामले पर राय मांगी है और इस मामले पर 9 मार्च को सुनवाई करने का आश्वासन दिया है.

Subramanian Swamy ने वर्ष 2020 में भी हाईकोर्ट में इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग की थी. इससे पहले वर्ष 2019 में उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को रामसेतु पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 6 हफ्तों का समय दिया था. उस समय यह भी कहा गया था, कि "अगर केंद्र सरकार इस पर कोई जवाब नहीं देती है, तो Subramanian Swamy Supreme Court Of India के लिए अपना रुख कर सकते हैं".

आपको जानकर काफी हैरानी होगी, कि UPA के शासन काल के समय Ram Setu को तोड़कर सेतुसमुद्रम परियोजना के तहत जहाजों के आने-जाने के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू किया जाना था. लेकिन Ram Setu को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर यह परियोजना रोक दी गई.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि भारत के इतिहास में Ram Setu का बहुत महत्व है. भारत के धर्म ग्रंथ ‘रामायण’ के साथ इसके निर्माण की कथा जुड़ी हुई है. रामायण में इस बात का वर्णन मिलता है, कि Ram Setu का निर्माण वानर सेना के द्वारा किया गया था. वानर सेना ने Ram Setu का निर्माण राम जी को लंका पार करने के लिए किया था. इस पुल की मदद से भगवान राम लंका तक पहुंचे थे. चूना पत्थरों के शिलाओं का यह सेतु लगभग 48 किलोमीटर लंबा है.

इस सेतु पर काफी चर्चा होती रही है. वर्ष 2007 में ASI ने कहा था, कि इस बात का कोई सबूत नहीं मिल पाया है कि यह सेतु मानव निर्मित है. इसके उपरांत, Supreme Court Of India ने अपना हलफनामा वापस ले लिया था.

आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें, कि रामायण के समय के पुरातत्वविदों के बारे में जानकारी के लिए वैज्ञानिकों के बीच में अभी भी बहस छिड़ी हुई है. Ram Setu और उसके आसपास के इलाके की प्रकृति और गठन को समझने के लिए पानी के नीचे के पुरातात्विक अध्ययन का भी प्रस्ताव दिया गया है.

रामसेतु को एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है. यह तमिलनाडु के दक्षिण पूर्वी तट पर मौजूद है. यह भारत के पंबन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच, चूना पत्थरों का एक पुल है. पंबन द्वीप को ही रामेश्वरम के नाम से भी जाना जाता है.

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