सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन योजना को बताया सही, कहा “बकाया राशि का भुगतान करे सरकार”

सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन योजना को बताया सही, कहा “बकाया राशि का भुगतान करे सरकार”

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश के सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन (One Rank One Pension) योजना को सही ठहराते हुए, एक नया आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सरकार से सेवानिवृत्त सैनिकों को 3 महीने के भीतर, बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कहा है. कोर्ट का कहना है, कि इस नीति में उन्हें कोई संवैधानिक कमी दिखाई नहीं देती.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वन रैंक वन पेंशन योजना को सही ठहराते हुए कहा, कि “इस नीति में किसी भी प्रकार की संवैधानिक कमी दिखाई नहीं देती. इस नीति में 5 साल में जो पेंशन की समीक्षा का प्रावधान है, वह बिल्कुल सही है. इसलिए कोर्ट, सरकार से सेवानिवृत्त सैनिकों को 3 महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने के लिए करने का आदेश देता है.”

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 7 नवंबर, 2015 को वन रैंक वन पेंशन योजना की अधिसूचना जारी की गई थी. इस अधिसूचना में यह कहा गया था, कि इस योजना की समीक्षा 5 वर्षों में होगी. इसी को लेकर, सेवानिवृत्त सैनिक संघ द्वारा यह मांग की गई थी, कि इस योजना की समीक्षा 1 साल के बाद हो. इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच विवाद छिड़ गया था और सेवानिवृत्त सैनिक संघ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी.

सेवानिवृत्त सैनिक संघ द्वारा जो याचिका दायर की गई थी, उसमें भगत सिंह कोश्यारी समिति द्वारा 5 साल में एक बार आर्थिक समीक्षा की मौजूदा नीति के बजाय, एक स्वचालित वार्षिक संशोधन के साथ वन रैंक वन पेंशन योजना को लागू करने की मांग उठाई गई थी.

इससे पहले, 16 फरवरी को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई थी. उस सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा था, कि “केंद्र वन रैंक वन पेंशन योजना की एक आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत करती है, लेकिन जब सुविधाओं को प्रदान करने की बात आती है, तब सशस्त्र बलों के पेंशनरों को यह सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाती?” इस पर केंद्र ने अपना पक्ष रखते हुए यह कहा था, कि “वन रैंक वन पेंशन योजना के सभी फैसले मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए हैं.”

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