Lal Bahadur Shastri: देश के इस लाल के लिए पूरे भारत ने छोड़ा एक वक्त का खाना

Lal Bahadur Shastri: देश के इस लाल के लिए पूरे भारत ने छोड़ा एक वक्त का खाना

2 अक्टूबर को प्रतिवर्ष हमारा देश अपने दो सपूतों का जन्मदिन मनाता है. अंग्रेज़ों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में एक साथ संघर्ष करने वाले महात्मा गांधी और Lal Bahadur Shastri का जन्मदिन संयोग से एक ही दिन, 2 अक्टूबर को होता है. हालांकि, स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान करने वाले महात्मा गांधी, उम्र में Lal Bahadur Shastri से कई वर्ष बड़े थे. 

Lal Bahadur Shastri, गांधी जी के विचारों से बेहद प्रभावित थे और पूरे जीवन एक प्रखर गांधीवादी के रूप में उन्होंने गांधी जी के मूल्यों और शिक्षाओं को अपने जीवन का आधार बनाकर रखा. गांधी जी का प्रमुख योगदान भारत को आज़ादी दिलाने में रहा था, तो वहीं Lal Bahadur Shastri ने गांधी जी द्वारा दिलाई गई आज़ादी को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. "जय जवान जय किसान" का लोकप्रिय नारा देने वाले Lal Bahadur Shastri के जन्मदिन पर आइये उनके जीवन पर प्रकाश डालते हैं.

Lal Bahadur Shastri का राजनीतिक जीवन

जनवरी 1921 में जब Lal Bahadur Shastri 10वीं कक्षा में पढ़ते थे, उस समय महात्मा गांधी ने बनारस का दौरा किया था. बनारस दौरे पर महात्मा गांधी की सभा में Lal Bahadur Shastri भी शामिल हुए थे. अपनी सभा में महात्मा गांधी ने युवाओं से आग्रह किया था कि, वह सरकारी स्कूलों को छोड़कर असहयोग आंदोलन में भाग लें. महात्मा गांधी की इस बात से प्रभावित होकर Lal Bahadur Shastri ने हरीश चंद्र हाई स्कूल छोड़ दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए. यहीं से शास्त्री जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई. उस समय Lal Bahadur Shastri की उम्र केवल 17 वर्ष थी. उनका यह राजनीतिक जीवन आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री पद के रूप में समाप्त हुआ. कांग्रेस में शामिल होने के बाद Lal Bahadur Shastri को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अलग-अलग आंदोलनों के कारण समय-समय पर जेल भी जाना पड़ा. इसमें 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जब गांधी जी गिरफ्तार कर लिए गए थे, तो शास्त्री जी ने 7 दिनों तक इलाहाबाद के आनंद भवन से आंदोलनकारियों को ज़रूरी निर्देश जारी किए.

आज़ादी के बाद, उन्होंने केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का भार संभाला. आज़ादी के बाद, शास्त्री जी ने परिवहन मंत्री, पुलिस विभाग के मंत्री, रेलवे मंत्री, घरेलू मामलों के मंत्री और वित्त मंत्री के पद पर सेवाएं दी. सन 1964 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु होने के बाद, Lal Bahadur Shastri ने भारत के प्रधानमंत्री का कार्यभार ग्रहण किया.

शास्त्री जी का निजी जीवन

Lal Bahadur Shastri का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 में हुआ था. शास्त्री जी अपने नाना के घर मुगलसराय उत्तर प्रदेश में जन्मे थे. उनकी मां का नाम राम दुलारी देवी और पिता का नाम शारदा प्रसाद था. उनकी उम्र जब महज़ डेढ़ साल रही होगी जब उनके पिता का बूबोनिक प्लेग महामारी के कारण निधन हो गया. तब उनकी मां डेढ़ वर्ष के शास्त्री जी और बड़ी बेटी को लेकर अपने पिता के घर वापस मुगलसराय आ गई. वहां पर आने के समय शास्त्री जी की मां 6 महीने की गर्भवती थी. मुगलसराय में उन्होंने अपनी तीसरी संतान को जन्म दिया. 

Lal Bahadur Shastri का जन्म एक भोजपुरी कायस्थ परिवार में हुआ, जिनका उपनाम श्रीवास्तव था. लेकिन जाति बंधनों के मुखर विरोधी शास्त्री जी ने अपने उपनाम का त्याग कर दिया. गांधीजी के कहने पर सरकारी स्कूल छोड़ने के बाद अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ में दाखिला लिया, जो कांग्रेस के निरीक्षक जे बी कृपलानी द्वारा स्थापित किया गया था. यहां से उन्होंने अपनी फिलॉसफी और एथिक्स में ग्रेजुएशन पूरी की. ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्हें शास्त्री की उपाधि दी गई, जो उन्होंने अपने पूरे जीवन इस्तेमाल की. शास्त्री जी का विवाह ललिता शास्त्री से सन 1928 में हुआ था.

Lal Bahadur Shastri की मौत का रहस्य

पाकिस्तान के साथ शांति समझौता पूरा करने के लिए शास्त्री जी 10 जनवरी, 1966 को तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकेंत शहर में गए थे. वहां 11 जनवरी को पाकिस्तान के जनरल अयूब के साथ उन्होंने शाम को 4:00 बजे ताशकेंत की धरती पर ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत किए. इसके बाद, रूसी राष्ट्रपति द्वारा उनके सम्मान में आयोजित एक भोज में उन्होंने हिस्सा लिया और प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करते हुए वापस अपने होटल लौट आए. उनके कुछ करीबियों के अनुसार, इस समय तक शास्त्री जी बिल्कुल सामान्य नज़र आ रहे थे. इसके बाद, रात 12:00 बजे के करीब जब सब सोने के लिए जा चुके थे, उसी वक्त रहस्यमई परिस्थितियों में शास्त्री जी की मौत हो गई. डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था परंतु उनका परिवार इस बात से संतुष्ट नहीं था. परिवार के साथ ही कई लोगों का मानना था कि, Lal Bahadur Shastri की मौत के पीछे गहरी साज़िश है. परिवार जनों का कहना था की, Lal Bahadur Shastri के शरीर पर चोटों के निशान देखे गए थे.

शास्त्री जी की रहस्यमई मौत पर कई फिल्में और किताबें लिखी गई हैं. हाल ही में, Vivek Agnihotri द्वारा निर्देशित 'The Tashkent Files' साल 2019 में रिलीज़ हुई थी, जो काफी चर्चा में रही. इसके अलावा, अनुज धर द्वारा लिखित 'शास्त्री के साथ क्या हुआ' किताब भी काफी चर्चा में रही थी.

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