राहुल गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 244 ए को लागू करने किया वादा।

राहुल गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 244 ए को लागू करने किया वादा।

राहुल गांधी ने वीडियो संदेश के जरिए आर्टिकल-244 (ए) के मामले को तूल दिया। आर्टिकल-244 (ए) पर, कांग्रेस ने क्या कहा? बीजेपी ने क्या कहा?

असम के कुछ हिस्सों में 1 अप्रैल को चुनाव है। राहुल गांधी ने संविधान 244 ए लागू करने का वादा किया। मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर कांग्रेस नेता ने असम के वे इलाके जहां आदिवासी बहुसंख्यक है उनके हितों की रक्षा की बात की। 

राहुल गांधी ने कहा, "भाजपा अनुच्छेद 244 ए को हटाकर पहाड़ी जनजातियों की संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं पर हमला कर रही है। हमारी आने वाली कांग्रेस सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अनुच्छेद 244 में कोई मिलावट नहीं है और इसके सभी खंड स्वदेशी लोगों के हितों की रक्षा के लिए लागू किए गए हैं।"

पहले आपको बता देते हैं कि आखिर क्या है आर्टिकल 244 ए, जिस का मसला अर्श से फर्श पर उछाला जा रहा है। आर्टिकल 244 ए असम के अंदर कुछ विशेष आदिवासी इलाकों में स्वशासी राज्य बनाने की अनुमति देता है। 1969 में उस वक्त की कांग्रेस सरकार द्वारा इसे संविधान का हिस्सा बनाया गया। इसमें एक विधानमंडल और मंत्री परिषद के सृजन का भी प्रावधान है।

तो चलिए अब पर्दे के पीछे की कहानी भी जान लीजिए। आखिर यह मांग लोगों की जुबां पर कैसे आई। 1950 के दशक में जब असम का विभाजन नहीं हुआ था, कुछ आदिवासी इलाकों में एक अलग पहाड़ी राज्य बनाने की मांग उठी। 1960 में पहाड़ी क्षेत्रों के विभिन्न राजनीतिक दलों ने "ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस" का गठन किया। लंबे समय तक आंदोलन की और 1972 में मेघालय को राज्य का दर्जा मिला। बथारी के अनुसार कार्बी आंगलोंग और उत्तरी कछार पहाड़ियों के नेता भी इसमें शामिल थें। उन्हें यह विकल्प पेश किया गया था कि वे असम में रहें या फिर मेघालय में शामिल हो। वे पीछे रह गए क्योंकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 244 ए के जरिए उन्हें अधिक शक्ति प्रदान करने का वादा किया था।

तब से ही इस आर्टिकल को जमीनी तौर पर लागू करने की मांग पहाड़ियों में गूंज रही है। फिर यह मांग केवल मांग नहीं रही। इसमें हिंसा अलगाववादी समूह और बहुत कुछ शामिल हुआ। करबी समूह ने 1980 के दशक में इसी मांग के ध्वज के नीचे आंदोलन किया और हिंसा का सहारा लिया। शीघ्र ही वह सशस्त्र अलगाववादी का विद्रोह बना जो पूर्ण राज्य की दर्जा का मांग कर रहा था।

फरवरी 2021 में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में कार्बी आंगलोंग जिले के पांच आतंकवादी समूहों के 1040 आतंकवादियों ने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। तो आज भी यहां चुनाव के मौसम में स्वशासी राज्यों के मांग के बादल मंडराते हैं। कितने वादे दिए जाते हैं और कितने वादे निभाए जाते हैं? इससे तो वहां के बाशिंदे ही वाकिफ होंगे।

इस पर भाजपा क्या कहती है यह भी जान लीजिए।

कुछ ही माह पहले जनवरी में असम के बीजेपी विधायकों का एक समूह और साथ ही साथ बीजेपी सांसद होरेन सिंह बे ने केंद्र को एक ज्ञापन सौंपा था। होरेन सिंह बे स्वशासी पहाड़ी जिलों के निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने ज्ञापन के जरिए अनुच्छेद 244 ए के कार्यान्वयन की मांग की। हाँलाकि अमित शाह ने अभी तक इस पर कोई खुली बात नहीं कही। इन पहाड़ी जिलों को बहुत बड़ा विकास का पैकेज देने का वादा किया है।

दीमा हसाओ, कार्बी आंग्लॉन्ग और वेस्ट कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी जिले 1 अप्रैल को मतदान करेंगे। जाहिर है उनकी मांगों को तो उछाला जाएगा और हो सके तो कुछ अपना मतलब भी निकाला जाएगा। ख़ैर, हम आपको चुनावी मंजर के हालातों से रूबरू करवाते रहेंगे।

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