Indira Kumari: धन दुरुपयोग मामले में पूर्व मंत्री और पति गिरफ्तार

Indira Kumari: धन दुरुपयोग मामले में पूर्व मंत्री और पति गिरफ्तार

तमिलनाडु की पूर्व मंत्री को सरकारी धन का दुरुपयोग करना महंगा पड़ गया. दरअसल, एक स्पेशल कोर्ट जो लोकसभा निर्वाचित सदस्यों और विधानसभा निर्वाचित सदस्यों के आपराधिक मामलों को सुनती है, ने तमिलनाडु की पूर्व मंत्री Indira Kumari, उनके पति, बाबू और भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को 5 साल की सज़ा सुनाई है. 

क्या है पूरा मामला 

R Indira Kumari 1991 से 1996 के बीच All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam(AIADMK) की सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री थीं. 1996 में Indira Kumari पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगा और यह मामला कोर्ट तक पहुंचा. अभियोग पक्ष के मुताबिक, आरोपी और अन्य लोगों ने ट्रस्ट बनाकर सरकारी धन की हेराफारी की है. उन्होंने कागजों में दिखाया कि धन का इस्तेमाल सही जगह हुआ है. आरोपियों ने सरकारी कागजों में यह बताया था, कि धनराशि को स्कूलों में लगा दिया गया है. लेकिन पड़ताल करने पर पता चला, कि उन्होंने जिन स्कूलों में सरकारी धन राशि के प्रयोग की बात कागजों में बताई है, ऐसे कोई भी स्कूल है ही नहीं. इस कारण सरकार को लाखों रुपयों का नुकसान हुआ. 

17 सालों तक कोर्ट में चला मामला

पूर्व मंत्री Indira Kumari और उनके पति बाबू के खिलाफ़ धन दुरुपयोग का मामला स्पेशल कोर्ट में 17 साल तक चलता रहा. हालांकि यह मामला 1996 में ही दर्ज कर लिया गया था, लेकिन इस मामले को लेकर सिविल कोर्ट के  स्पेशल जज के सामने चार्जशीट, वर्ष 2004 में पेश की गई थी. जिसके बाद से यह मामला 17 साल तक कोर्ट में लंबित रहा था. 

सहायक सत्र न्यायाधीश N Alicia ने बुधवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए Indira Kumari और उनके पति, बाबू को दोषी ठहराया. न्यायधीश ने Indira Kumari और उनके पति को दोषी ठहराते हुए 5 साल कारावास की सजा सुनाई है.

जानकारी के मुताबिक़ कोर्ट के फैसले के बाद Indira Kumari ने सांस लेने में तकलीफ़ होने के कारण खुद को अस्पताल में भर्ती करवाया है. वहीं, पार्टी की ओर से Indira Kumari को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 

कौन हैं R Indira Kumari 

Indira Kumari, 1991 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में नटरामपल्ली विधानसभा से विधायक चुनी गई थीं. जिसके बाद वह 1991-1996 तक J Jayalalitha कैबिनेट में सामाजिक मंत्री रही थीं. हालांकि, 2006 में उन्होंने AIADMK को छोड़कर Dravida Munnetra Kazhagam(DMK) पार्टी को अपना लिया था. 

चप्पल घोटाले में भी आया था Indira Kumari का नाम

Indira Kumari और एक अन्य मंत्री, पी ईश्वरमूर्ति पर 1.20 करोड़ रुपयों वाले चप्पल घोटाले का आरोप भी लगा था. हालांकि, सबूतों के अभाव और अनुचित जांच के कारण कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया था. उन पर 1991 से 1996 के बीच, Jayalalitha सरकार के दौरान राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों वाले स्कूली बच्चों के लिए चप्पल की खरीद और वितरण में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया था. Indira Kumari उस समय सामाजिक कल्याण मंत्री थीं, जिस कारण चप्पलों की खरीद से लेकर मुफ्त वितरण की सारी जिम्मेदारी उनकी ही थी. Indira के खिलाफ 26 जून 1998 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था, जबकि आरोप 14 सितंबर 1999 को तय किए गए थे. 2004 में स्पेशल कोर्ट ने सभी को यह कहते हुए बरी कर दिया था, कि कोर्ट में पेश किए गए कई गवाहों की गवाही विश्वसनीय नहीं है, जांचकर्ताओं ने इस मामले में ढिलाई बरती है, और पेश किए गए सबूत आरोपी के अपराध को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. 

क्या है विशेष न्यायालय

किसी एक न्यायालय को ही विशेष का दर्जा देकर उस पर महत्वपूर्ण या विशेष भार का दर्जा सौंपा जाता है. विशेष न्यायालय आर्थिक अपराध, कानून और व्यवस्था, सामाजिक न्याय, नियमन संबंधी अपराध, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों के लिए बनाई जाती है. Indira Kumari मामले में भी विधायकों और सांसदों की सुनवाई विशेष अदालत के जरिए की गई है.

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