Maharashtra News: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया BJP के 12 विधायकों का निलंबन

Maharashtra News: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया BJP के 12 विधायकों का निलंबन

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने Maharashtra की महाविकास अघाड़ी सरकार को बड़ा झटका दिया है. Maharashtra विधानसभा से निलंबित किए गए 12 BJP विधायकों के एक साल के निलंबन को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि विधानसभा से विधायकों के निलंबन का यह फैसला असंवैधानिक और मनमाना है.

गौरतलब है, कि 6 जुलाई 2020 को BJP के 12 विधायकों पर विधानसभा के पीठासीन अधिकारी Bhaskar Jadhav के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा था. जिसके बाद, उन सभी विधायकों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया था. विधानसभा के इस आदेश के बाद आशीष शेलार और महाराष्ट्र के अन्य भाजपा विधायकों द्वारा शीर्ष अदालत में एक रिट दायर की गई थी.

जिस पर आज न्यायाधीश, एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाया है. उन्होंने, कहा कि 5 जुलाई, 2021 को महाराष्ट्र विधानसभा के 12 भाजपा विधायकों को एक साल के लिए निलंबित करने का फैसला अवैध है. सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले को लेकर Maharashtra सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है. इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय 19 जनवरी को मैराथन सुनवाई के बाद इस फैसले को सुरक्षित रख लिया था.

सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था, कि महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा विधायकों का एक साल का निलंबन सही है या नहीं. शीर्ष अदालत ने कहा था, कि "ये निलंबन जुलाई में चल रहे मानसून सत्र के लिए ही हो सकता था. ये फैसला लोकतंत्र के लिए खतरा है और तर्कहीन है".

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी, कि "एक साल के लिए विधायकों को निलंबित करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. क्योंकि, इस कारण उनके निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा. असली मुद्दा तर्कसंगतता का है, किसी उद्देश्य के लिए ऐसा होना चाहिए. एक साल तक निलंबन के पीछे कोई वाजिब और उचित कारण होना चाहिए. एक वर्ष के लिए निलंबन का निर्णय तर्कहीन है. इस वजह से संबंधित निर्वाचन क्षेत्र को छह महीने से अधिक समय तक प्रतिनिधित्व से वंचित किया जा रहा है.

इन विधायकों को दिया गया था एक साल का निलंबन

संजय कुटे,आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भटकालकर, पराग अलावनी, हरीश पिंपले, राम सातपुते, विजय कुमार रावल, योगेश सागर, नारायण कुचे, और कीर्ति कुमार भांगडिया

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