Policybazaar IPO: मुनाफे से दूर कंपनी में निवेश करना कितना सही?

Policybazaar IPO: मुनाफे से दूर कंपनी में निवेश करना कितना सही?

साल 2021 में भारत, IPO निवेशकों के लिए बेहतरीन साल रहा है, जहां कई सारे बड़े IPO इस साल स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुए हैं. इनमें से कुछ तो स्टार्टअप कंपनियां भी हैं, जो फिलहाल प्रॉफिट कमाने के लिहाज़ से काफी औसत थी. इसके बावजूद इन कंपनियों की स्टॉक मार्केट में धमाकेदार प्रवेश हुआ है. अब एक और बड़ा IPO, निवेशकों के लिए लाॅन्च हो चुका है. Policybazaar, जो एक इंश्योरेंस पॉलिसी सर्विस देने वाली कंपनी है, 5,625 करोड़ रुपए के IPO की शुरआत 1 नवंबर से कर चुकी है. 

Policybazaar को अपने IPO को लेकर, निवेशकों से मिली जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है. कंपनी अब भी घाटे में चल रही है. वहीं शेयर का बैंड प्राइस 980 तक होने की उम्मीद लगाई जा रही है, जो कि कंपनी की वैल्यू के आधार से 44 गुना अधिक है. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है, कि शेयर कितना ओवर सब्सक्राइब होने वाला है. हालांकि, Policybazaar ने पिछले कुछ सालों में अपने घाटों को काफी हद तक कम भी किया है. बढ़ती हुई फाइनेंशियल लिटरेसी के साथ-साथ इंश्योरेंस सेक्टर में वृध्दि होने की काफी उम्मीद लगाई जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस IPO के साथ Policybazaar के शेयर से 15% से 20% तक का 'लिस्टिंग गैन' होने के आसार हैं. विशेषज्ञों का यह भी कहना है, कि लंबे समय के लिए कंपनी के प्रदर्षन के बारे में अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा. 

Policybazaar के IPO से पहले, Zomato जैसी कंपनियों के IPO को लेकर बाज़ार में काफी उत्साह था. घाटे में रहने के बाद, भी निवेशकों ने कंपनी ने बेहद भरोसा दिखाया और IPO के पहले ही दिन, कंपनी के शेयर में अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिली थी. इस साल में कई और नए यूनिकॉर्न बने हैं, जो जल्द ही शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारियों में लगे हुए हैं.

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