Narendra Modi: Mette Frederiksen ने कहा जलवायु परिवर्तन पर भारत को मिलेगा डेनमार्क का साथ

Narendra Modi: Mette Frederiksen ने कहा जलवायु परिवर्तन पर भारत को मिलेगा डेनमार्क का साथ

भारत की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान डेनमार्क की प्रधानमंत्री, Mette Frederiksen ने रविवार, 10 अक्टूबर को दुनिया के 7 अजूबों में से एक, ताजमहल का दौरा किया. उन्होंने ताजमहल की प्रशंसा की और इसे एक खूबसूरत जगह के रूप में बताया. आज सुबह डेनमार्क की प्रधानमंत्री, Mette Frederiksen ने भारत के प्रधानमंत्री, Narendra Modi से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत और डेनमार्क के बीच मज़बूत और सौहार्दपूर्ण संबंधों पर ज़ोर दिया. 

भारत के प्रधानमंत्री, Narendra Modi और डेनमार्क की प्रधानमंत्री, Mette Frederiksen ने बहुपक्षवाद और वैश्विक नियम-आधारित प्रणाली में सुधार करने के अपने प्रयासों को तेज़ करने का फैसला किया. इस फैसले में नेविगेशन की स्वतंत्रता भी शामिल है. दोनों पक्षों ने आगे की सोचकर, परिणाम-उन्मुख हरित सैन्य साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिज्ञा की भी पुष्टि की. इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने कहा था, कि दोनों देश अपनी द्विपक्षीय चर्चा में अक्षय ऊर्जा, प्रदूषण की रोकथाम, खेती, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, स्मार्ट शहरों, जल और अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा करेंगे.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, Narendra Modi और Mette Frederiksen की बैठक के दौरान यह भी कहा गया, कि भारत और डेनमार्क के बीच मज़बूत व्यापार और निवेश संबंध हैं. मेक इन इंडिया, जल जीवन मिशन, स्मार्ट सिटीज़, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्वच्छ भारत और स्वच्छ गंगा आदि जैसे प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों को आगे बढ़ाते हुए, डेनमार्क के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र पहले से ही भारत के कई राज्यों में सक्रिय रूप से शामिल हैं. 

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच, एक आभासी शिखर सम्मेलन में अंतिम रूप दी गई हरित साझेदारी का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग के महत्वपूर्ण विस्तार की एक रूपरेखा तैयार करना है.

डेनमार्क जलवायु कानून वाले उन कुछ देशों में से है, जिसने साल 2030 तक साल 1990 के स्तर की तुलना में डेनमार्क के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 70% की कटौती करने का लक्ष्य रखा है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री, Mette Frederiksen जलवायु संकट को अपनी सरकार के लिए शीर्ष एजेंडा के रूप में देखती हैं. उनका विश्वास है, कि आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन एक साथ हो सकता है. ग्लासगो जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले, वह भारत के साथ हरित रणनीतिक साझेदारी करने का कार्य करना चाहती हैं.

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