Indian Railways Kavach Technology: भारत के ये कॉरिडोर होंगे ‘कवच’ से लैस

Indian Railways Kavach Technology: भारत के ये कॉरिडोर होंगे ‘कवच’ से लैस

भारतीय रेलवे की सुरक्षा भारत सरकार के लिए एक अहम मुद्दा बन चुकी है. इसके साथ ही, 4 मार्च को भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने रेलवे से जुड़ी ‘कवच’ (Kavach) तकनीक का लिंगमपल्ली - विकाराबाद सेक्शन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) की मौजूदगी में ट्रायल किया था. वहीं शुक्रवार 1 अप्रैल को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर 'कवच' टेक्नोलॉजी यानी तकनीक लागू करने की योजना के बारे में बताया है.

केंद्रीय मंत्री रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीजेपी सांसद बृज लाल (Brij Lal) के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा, कि “28 फरवरी 2022 तक यह तकनीक साउथ सेंट्रल रेलवे पर 1098 रूट किलोमीटर पर लागू की गई है. इसके साथ ही उन्होंने बताया, कि आने वाले समय में ‘कवच’ 3009 रूट किलोमीटर पर लागू किया जाएगा. यह दिल्ली-मुंबई और दिल्ली -हावड़ा कॉरिडोर पर लागू होगा.”

ऐसे काम करेगा ‘कवच’

आपको बता दें, कि ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन ‘कवच’ को रिसर्च डिजाइन व स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने इंडियन इंडस्ट्री के साथ मिलकर तैयार किया है. साउथ सेंट्रल रेलवे के मुताबिक यह तकनीक इतनी सटीक है, कि अगर तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही ट्रेनें आमने-सामने भी आ जाती हैं, तो इन ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी और रेड सिग्नल पार करते ही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाएगा. वहीं, अगर उस दौरान पीछे से भी कोई ट्रेन आ रही है, तो उनकी आपस में टक्कर नहीं होगी. इसके अलावा, अगर ट्रेन एक सीमा से अधिक की स्पीड से चल रही है, तो उस पर भी अपने आप ब्रेक लग जाएगा.

जानिए Indian Railways के ‘कवच’ की विशेषताएं

1. खतरे में सिग्नल पार करने से रोकना.

2. ओवर-स्पीडिंग से बचने के लिए स्वचलित-रूप से ब्रेक लगाना.

3. आपातकालीन स्थितियों के दौरान एसओएस (SOS) संदेश भेजना.

4. नेटवर्क सिस्टम के माध्यम से ट्रेन की आवाजाही पर निगरानी रखना.

5. इस प्रणाली के तहत आगे आने वाली लेवल क्रॉसिंग से पहले, हूटर अपने आप बज जाता है. इसके साथ ही, इस तकनीक से कोहरे की स्थिति में लोको-पायलटों (यानी ट्रेन ड्राईवर) को स्पष्ट रूप से देखने में सहायता मिलेगी.

6. किसी घुमावदार मोड़ या पुलों को पार करते समय, ट्रेन की गति स्वचालित रूप से कम होकर निर्धारित सीमा पर पहुँच जाती है.

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