Tax in India: सरकारी आय के महत्वपूर्ण श्रोत की कैसे हुई शुरुआत, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Tax in India: सरकारी आय के महत्वपूर्ण श्रोत की कैसे हुई शुरुआत, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

भारत में आज़ादी के पहले से ही Tax लागू हो चुका था. वर्ष 1860 में देश को पहली बार आयकर से रुबरु होने का मौका मिला, जो व्यापार जगत में एक सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से शुरू हुआ था. मगर फिलहाल देश में कर को अर्थव्यवस्था से सीधा जोड़कर देखा जाता है. साथ भी, इसमें किए गए अंशदान को करदाता देश की तरक्की में अपना योगदान समझता है. 

Tax प्रणाली में आए हैं बदलाव 

भारत में आयकर से हुई Tax की शुरुआत, आज Tax Deducted at Source (TDS) और GST तक पहुंच चुकी है. जहां TDS वो राशि है, जो एक संस्था करदाता की आय से काटकर सरकार को Tax स्वरूप में देती है. यह राशि, आयकर विभाग के सहयोग से एक तय सीमा तक वापस भी मिल जाती है. वहीं GST के आने से भारतीय कर प्रणाली को लाभ मिला है.

Tax को ऐसे समझें

आसान भाषा में समझें, तो Tax देश के नागरिकों पर लगने वाला एक ऐसा शुल्क है, जो सरकार लगाती है. साथ ही, यह शुल्क नागरिकों के अलावा संस्थाओं पर भी लगाया जाता है. जिससे राजस्व इकट्ठा करने में आसानी हो. भारतीय व्यवस्था में Tax दो प्रकार के होते हैं, एक प्रत्यक्ष और दूसरा अप्रत्यक्ष. 

क्या है प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष?  

1. प्रत्यक्ष कर : Tax के इस प्रकार से ही पता चलता है कि, इसके द्वारा एकत्रित राशि सीधा सरकार के पास जाती है. इनका सीधा संबंध, करदाताओं की आय से होता है. 

प्रत्यक्ष करमायने
आयकरनागरिकों द्वारा सरकार को आय पर दिया जाने वाला कर. करदाताओं के लिए ऑनलाइन वेबसाइट की सुविधा उपलब्ध हैं.
पूंजी लाभ करकिसी संपत्ति को खरीदकर 3 वर्ष के अंदर बेचने पर मिलने वाला लाभ, पूंजी लाभ कहलाता है और उस पर लगने वाला कर, पूंजी लाभ कर. 
संपत्ति करयह एक अनिवार्य कर है, जिसका भुगतान करदाताओं को नगर निगम को करना होता है. इस पर लगने वाली कीमत का मूल्यांकन, संपत्ति के आधार पर किया जाता है. 
निगमित करयह कर सरकार द्वारा आयकर अधिनियम 1961 के तहत कंपनियों पर लगाया जाता है. आम भाषा में इसे 'कंपनी लाभ कर' भी कहते हैं. 
उपहार करभारत में 50,000 रुपए से कम राशि के उपहार पर कर नहीं लगता. जबकि, इससे ज़्यादा की राशि पर सरकार द्वारा कर का प्रावधान है.
पेशा करएक निर्धारित सीमा से अधिक की आय होने पर, सरकार या राज्य सरकारों द्वारा पेशे पर भी कर जारी होता हैं. 

2. अप्रत्यक्ष कर : ये Tax देश के नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे सामान और सेवाओं पर लगता हैं. इनपर प्राप्त राशि, सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से हासिल होती है.

अप्रत्यक्ष करमायने
वस्तु एवं सेवा कर (GST) साल 2017 में लागू हुई यह व्यवस्था, आज कर सुधार में अहम है. यह काफी सारे अप्रत्यक्ष कर का मिश्रण है, जिससे कर को संक्षिप्त किया जा सकें.
वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) भारत में GST से पहले VAT ही था, जो लगातार चर्चा में था. यह बिक्री के लिए तैयार वस्तु पर इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर लगता है.
बिक्री करये कर एक विशेष श्रेणी में शामिल है. जहां यह हर बार वस्तु या सेवा की बिक्री पर लगता है, फिर चाहें मूल्य में परिवर्तन हो या ना हो.
सेवा करये नागरिकों से सेवा के बदले लिया जाने वाला कर है. इनमें होटल, रेस्टोरेंट, आदि द्वारा लगाया कर शामिल है. 
उत्पाद करउत्पाद कर उन चीज़ों पर लगता है, जो देश के अंदर निर्मित हो रही है. आज के समय में इसे केंद्रीय वैल्यु एडेड टैक्स भी कह सकते हैं. 
मनोरंजन कर यह कर काफी प्रचलित हुआ करता था, जो फिल्मों, थिएटर, मनोरंजन पार्क, आदि पर लगाया जाता था. पर GST के आने के बाद, इसकी मान्यता रद्द कर दी गई. 

नियमों का पालन इसलिए है ज़रूरी

भारत में कर पर GOI ने कुछ अधिनियम भी बना रखे हैं. जिससे करदाताओं की हित की रक्षा हो और इसमें सेंधमारी करने वालों पर कार्यवाही हो. एक नज़र कर संबंधित इन नियमों पर- 

1. धारा 140A (1) के आधार पर ऐसा कहा गया है, कि अगर करदाता आंशिक या पूर्ण रूप से Tax का भुगतान करने में असफल है, तो उसे डिफाॅल्टर घोषित किया जाए. वहीं धारा 221 (1) के अन्तर्गत इस स्थिति में संबंधित अधिकारी करदाताओं पर बकाया राशि के बराबर का जुर्माना लगा सकता है. 

2. सरकार द्वारा डिफाॅल्टरों के लिए ये नियम है कि, संबंधित अधिकारी जवाब से संतुष्ट ना होने पर व्यक्ति की संपत्ति की जानकारी मांग सकता हैं. यह अधिकार सरकार और मौजूद अधिकारी को संविधान की धारा 142 (1) या धारा 143 (2) देती है. 

करदाताओं के कर से संबंधित सवाल का ये है जवाब

प्रश्न : करदाता कौन हैं? 

उत्तर : एक निश्चित आय से ज़्यादा कमाने वाला हर नागरिक करदाता हैं. फिर वो आपकी आय हो या फिर आपके द्वारा इस्तेमाल की गई सेवा.

प्रश्न : भारत में कर पर निर्णय कौन लेता हैं? 

उत्तर : भारत में Tax पर अंतिम निर्णय सरकार का होता है. हालांकि, सरकार को CBDT और GST जैसे विभाग सुझाव देते रहते हैं. 

प्रश्न : देश के लिए कर क्यों ज़रुरी है? 

उत्तर : किसी भी देश के लिए कर, राजस्व जुटाने का एक प्रमुख आधार है. इनसे आई हुई राशि ही देश की अर्थव्यवस्था और विकास को रफ़्तार देती है. 

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