GDP Of India: 10 सालों में कितनी बदल चुकी है भारतीय अर्थव्यवस्था, यहां पढ़े पूरी रिपोर्ट

GDP Of India: 10 सालों में कितनी बदल चुकी है भारतीय अर्थव्यवस्था, यहां पढ़े पूरी रिपोर्ट

सिर्फ सभ्यता, रोज़गार और आमदनी के दम पर यह कहना कि देश विकसित है, यह पूर्णतः गलत है. किसी भी देश को आर्थिक पैमाने पर जांचने के लिए सबसे ज़रूरी है, Gross Domestic Product (GDP) का आंकड़ा. यह आंकड़ा इस बात को सुनिश्चित करता है कि, कौन सा देश किस रफ़्तार और दिशा में आगे जा रहा है. इसके अलावा, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था किस चीज़ से प्रभावित है, उसका लेखाजोखा भी कई बार GDP प्रस्तुत करती है. 

GDP क्या है? 

साल भर देश-विदेश में चर्चा में रहने वाली GDP,  देश में उत्पन्न सेवा और वस्तु की कुल लागत को कहते हैं. यह बिल्कुल किसी स्कूल जाने वाले छात्र की मार्कशीट जैसी है, जिसमें उसकी अच्छाई और बुराई की एक झलक देखी जाती है. GDP रिपोर्ट में भी बताया जाता है कि, देश किन आर्थिक गतिविधियों में सफल है और किन में असफल. 

ऐसे तय होती है GDP की दर

भारतीय अर्थव्यवस्था की बात करें, तो Central Statistics Office (CSO) द्वारा एक साल में 4 बार GDP के आंकड़े प्रस्तुत किये जाते हैं. वहीं GDP का आधार कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र से है.

1. Consumption Expenditure : इसमें लोगों द्वारा उपलब्ध वस्तु और सेवाओं की खपत पर किया गया खर्च शामिल है. 

2. Government Expenditure : यह सरकार की वस्तु और सेवाओं के व्यय को दर्शाता है. इससे GDP तय करने में काफी मदद मिलती है, क्योंकि सरकार द्वारा किए गए खर्च पर देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर करती है. 

3. Investment Expenditure : देश के विकास और अन्य संसाधनों में किया जाने वाला निवेश भी अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम योगदान देता है. इसी कारण, जारी हुई GDP पर निवेश की भूमिका खास है. 

4. Net Export : आयात-निर्यात हमेशा से ही किसी भी देश की नींव मज़बूत करने में अहम रहें है. लेकिन जहां बात अर्थव्यवस्था की हो, तो निर्यात के मायने अधिक हैं, क्योंकि इसके आधार पर भी GDP पर असर पड़ता है.

आपको बता दें, कि GDP का आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए कुछ खास क्षेत्रों की सेवाएं शामिल की जाती है. इनमें कृषि, उत्पादन, बिजली, गैस, माइनिंग, होटल, निर्माण, दूरसंचार, वित्त, व्यापार, सार्वजनिक सेवाएं आदि शामिल हैं. आमतौर पर हम GDP को अर्थव्यवस्था के विकास का पैमाना मानते हैं. 

10 सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था में आए बदलावों पर एक नज़र 

वर्षGDP ग्रोथअर्थव्यवस्था पर प्रभाव
2021 (जून तिमाही) 20.1%वर्ष 2021 की जून तिमाही में भारत की GDP में कुछ राहत मिली है. सरकारी रिपोर्ट के हिसाब से GDP में वर्ष 1990 के बाद ऐसी वृद्धि देखी गई है. 
2020-7. 96%Covid-19 महामारी से भारतीय अर्थव्यवस्था एकदम से हिली नज़र आई. वार्षिक स्तर पर यह 12.01% की दर से कमज़ोर देखी गई थी. 
20194.04%इस साल की GDP, बीते 7 सालों में सबसे कमज़ोर साबित हुई. प्रमुख बैंकों के विलय, Foreign Direct Investment (FDI) के नियमों में बदलाव और वित्तीय घरानों को टैक्स में राहत, अर्थव्यवस्था को कुछ खास पसंद नहीं आया. 
20186.53%वर्ष 2018 में तेल की बढ़ती कीमतों ने अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया. मगर फिर भी बीते समय व्यापार को लेकर सरकार की पहल ने GDP के आंकड़ों को सहारा दिया था. 
20176.80%इस वर्ष तत्कालीन वित्त मंत्री Shri Arun Jaitley द्वारा लाया गया Goods and Services Tax (GST), अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम था.. 
20168.26%Demonetisation यानी नोटबंदी की सूचना से वर्ष 2016 यादगार बन गया था. पर जिस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस वर्ष GDP में छलांग लगाई, वो स्तब्ध करने वाली थी. वर्ष 2016 में लगभग हर तिमाही के नतीजे 5% के ऊपर ही थे. पर 8.26% के आंकड़े से आम नागरिकों के प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई. 
20158.00%वर्ष 2015 में GDP के आंकड़ों कि बदौलत भारत की विश्व में मौज़ूदगी, 196 देशों में 7वीं हो गई थी. डॉलर के रूप में देखें, तो यह 2,103,590 मिलियन डॉलर था. 
20147.41%1.02 की वार्षिक दर की बढ़ोतरी के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले वर्ष की तुलना में शानदार प्रदर्शन किया. 
20136.39%वर्ष 2013 में GDP 1,856,720 मिलियन डॉलर थी. इस आंकड़े के बाद Reserve Bank of India (RBI) ने सामने से आकर ब्याज दरों में कटौती की थी. 
20125.46%वर्ष 2012 को लेकर अनुमान था कि, यह एक दशक का सबसे बुरी GDP वाला वर्ष होगा. मगर डिसपोजे़बल आय और कृषि के दम पर अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ. 

देश के नागरिकों को कैसे प्रभावित करते हैं इसके आंकड़े

GDP में आए उतार-चढा़व सीधे तौर पर देश के प्रति व्यक्ति आय को प्रभावित करते हैं. जैसे GDP में हुई 4% की वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में 421 रुपए की वृद्धि होगी. वहीं विकास दर में 1% की गिरावट का मतलब, प्रति व्यक्ति आय में 105 रुपए की कमी. इसके अलावा, GDP दर में आई कमी, देश में अर्थव्यवस्था के अलावा रोज़गार पर भी गहरी छाप छोड़ती है. 

फिलहाल, GDP की आखिरी तिमाही रिपोर्ट आनी अभी बाकी है, जो साल के अंत में जारी होगी. फिलहाल, बीते 10 सालों में भारत जिस तरह मज़बूत होकर आगे बढ़ा है, वो तारीफ के काबिल है. 

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