Har Ghar Nal Ka Jal Scheme: बिहार के उपमुख्य्मंत्री पर क्यों लगे इल्ज़ाम? यहां समझें पूरी कहानी

Har Ghar Nal Ka Jal Scheme: बिहार के उपमुख्य्मंत्री पर क्यों लगे इल्ज़ाम? यहां समझें पूरी कहानी

 2016, सितम्बर में बिहार की Har Ghar Nal ka Jal (हर घर में नल का पानी) योजना को शुरुआत हुई. तब से लेकर अब तक इस योजना के तहत 152.16 लाख नल कनेक्शनों को पीने का पानी उपलब्ध हो चुका है. यह योजना केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत प्रदान किए गए 8.44 लाख कनेक्शन और राष्ट्रीय ग्रामीण पीने का पानी कार्यक्रम के माध्यम से 2.32 लाख कनेक्शन से अलग है.

Har Ghar Nal Ka Jal योजना को अलग अलग श्रेणियों के तहत राज्य की चार मुख्य योजनाओं का एक समूह के रूप में अंकित किया गया है. इस योजना को मुख्य रुप से शहरी और ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था. इस योजना का लक्ष्य था कि पूरे बोर्ड में स्वास्थ्य में सुधार किया जाए. ताकि सभी को स्वच्छ पीने के पानी तक आसान पहुंच बन सके.

 सुबह, दोपहर और शाम दो-दो घंटे पीने का पानी की आपूर्ति Har Ghar Nal Ka Jal योजना के अंतर्गत की जाती है. इसे लागू करने के लिए, मानक बोली दस्तावेजों (SBD) का इस्तेमाल होता है. इन दस्तावेजों के जरीए ठेकेदारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग (PHED), और पंचायती राज और शहरी विकास विभाग द्वारा काम आवंटित किया जाता है.

पंचायती राज के तहत काम के लिए पंचायत समिति को योजना को लागू की गई है. ये समिति एक वार्ड के आकार और घरों की संख्या के आधार पर परियोजना लागत को तय करती है. फिलहाल इसकी परियोजना लागत को 15-18 लाख रुपये तय किया गया है.  इन सब के बीच पानी की बरबादी करने वाले लोगों पर 350 रूपये से 5000 रूपये तक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान बनाया गया है. 

बिहार में Har Ghar Nal Ka Jal योजना क्यों बनी बहस का मुद्दा?

खबरों के मुताबिक़ मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा शुरू की गई इस योजना में जहां गरीब जनता को लाभ मिला तो साथ ही कुछ राजनैतिक योद्धाओं ने भी इस योजना से काफी लाभ उठाया है. एक अंग्रेजी अखबार के माध्यम से आई खबर के मुताबिक बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के परिवार को इस योजना के तहत 53 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं मिली हैं. साथ ही उन पर इस बात का इल्जाम भी लगा है की ठेका देते समय उन्होंने उचित नियमों का पालन नहीं किया तथा अपने परिवार के पक्ष में ही फैसले सुनाए. इसके बाद दो सत्तारूढ़ दलों, JD (U) और भाजपा के राज्य-स्तरीय नेताओं के एक समूह  का नाम आता है.

रिकॉर्ड बताते हैं कि 2019-20 में, PHED ने कटिहार जिले के कम से कम नौ पंचायतों  के लिए  Har Ghar Nal Ka Jal योजना के तहत 36 परियोजनाएं आवंटित कीं गई थी. इसी जगह से उपमुख्यमंत्री प्रसाद चार बार विधायक रहे हैं. इसमें कई वार्ड भी कवर किए गए थे. इस आवंटन में उनकी बहू पूजा कुमारी और उनके साले प्रदीप कुमार भगत को काफी फायदा मिला है. इसमें सहयोगी प्रशांत चंद्र जायसवाल, ललित किशोर प्रसाद और संतोष कुमार का नाम भी सामने आ रहा है. इसके साथ ही, कटिहार शहर से 10 किलोमीटर दूर भवदा पंचायत के चार वार्डों में पानी सप्लाई काम पूरा किया गया. जिसकी अनुमानित लागत 1.6 करोड़ रुपये है. लेकिन PHED की परियोजना जून 2016 से जून 2021 तक कटिहार में पूरी हो चुकी है. इस पूरी परियोजना का लगभग 63% पैसा पूजा कुमारी के हिस्से में आया है.

इस पर क्या रही बिहार के उप मुख्यमंत्री की सफाई

इन सबके बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने इस इल्जाम पर सफाई देते हुए कहा कि, "पूरे बिहार में उनके अंडर कम से कम 2800 यूनिट आते हैं. जिनमें से सिर्फ चार यूनिट ही उनके परिवार वालों को दिए गए हैं. ऐसे में व्यापार करना कुछ गलत नहीं कृपया इसे राजनीतिक तौर पर ना जोड़ें."

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