Factoring Regulation (Amendment) Bill: निर्मला सीतारमण संसद में आज पेश करेंगी बिल

Factoring Regulation (Amendment) Bill: निर्मला सीतारमण संसद में आज पेश करेंगी बिल

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पशुपति कुमार पारस आज संसद में Factoring Regulation (Amendment) Bill का प्रस्ताव रखेंगे. इस के तहत पहला प्रस्ताव फैक्टरिंग लॉ के दायरे को चौड़ा करना है. वहीं दूसरा उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान (कुंडली) और भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (तंजावुर) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में घोषित करना है. बिल के तहत RBI को एक फैक्टर को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देने, सेंट्रल रजिस्ट्री में ट्रांजेंक्शन डिटेल्स फाइल करने और अन्य सभी मामलों के लिए नियम बनाने का अधिकार मिलता है.

इन दो विधेयकों को इस सप्ताह की शुरुआत में लिया जाना था. लेकिन राजनेताओं, पत्रकारों और संवैधानिक अधिकारियों के इजरायली स्पाइवेयर पेगासस रिपोर्ट पर चल रही बहस के कारण ऐसा नहीं हो सका. विधेयक "असाइनमेंट", "प्राप्तियां" और "फैक्टरिंग व्यवसाय" की परिभाषाओं में संशोधन करना चाहता है.

फैक्टरिंग क्या है?

फैक्टरिंग व्यापार के तहत संगठन फैक्टर कहा जाता है. फैक्टर एक बैंक, एक पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कोई भी कंपनी हो सकती है. फैक्टर किसी अन्य इकाई यानी की असाइनर से बिल छूट के आधार पर प्राप्तियों या ऋण ले लेता है. इस व्यवस्था में बेचने वाले माल या सेवा की बिक्री के बदले प्राप्तियां शामिल होती हैं. जिन्हें छूट पर फैक्टर को बेचा जाता है. जिससे वह खरीदार से भविष्य के ऋण वसूली के लिए उत्तरदायी हो जाता है. मौजूदा समय में फैक्टर अनिवार्य रूप से ग्राहक के परिचालन खर्चों के लिए बहुत आवश्यक तरलता प्रदान करता है.

ध्यान दें कि Factoring Regulation (Amendment) Bill के तहत प्राप्य की सुरक्षा के खिलाफ बैंक द्वारा प्रदान की जाने वाली क्रेडिट सुविधाओं को फैक्टरिंग व्यवसाय नहीं माना जाता है.

Factoring Regulation (Amendment) Bill की पृष्ठभूमि

यह बिल पिछले साल सितंबर में लोकसभा में पेश किया गया था. Factoring Regulation Bill 2011 में संशोधन करते हुए बिल उन संस्थाओं के दायरे को विस्तृत करने का प्रयास करता है, जो फैक्टरिंग व्यवसाय में शामिल हो सकते हैं. साथ ही इससे फैक्टरिंग लेनदेन की सुविधा भी प्रदान कर सकते हैं. इसे स्थायी समिति को भेजा गया था, जिसने इस साल फरवरी में अपनी रिपोर्ट दी थी.

Factoring Regulation (Amendment) Bill फैक्टर्स के लिए उनके द्वारा दर्ज किए गए हर लेनदेन के विवरण को दर्ज करने के लिए 30-दिन की अवधि को खत्म कर देता है. इस तरह के लेनदेन के लिए पंजीकरण प्राधिकरण वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुन:निर्माण और सुरक्षा हित के प्रवर्तन (सरफेसी) अधिनियम 2002 के तहत केंद्रीय रजिस्ट्री सेटअप में होता है.

बिल से MSME को होगा फायदा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने कहा कि, "MSME फैक्टरिंग के एक प्रमुख लाभार्थी हैं. साथ ही फैक्टरिंग तक पहुंच होने से उन्हें अपने नकदी प्रवाह और तरलता की स्थिति में सुधार करने और अपने कार्यशील पूंजी चक्र को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी. MSME को इस नियामक परिवर्तन का एक प्रमुख लाभार्थी होने की उम्मीद है, क्योंकि उनके पास TRDS प्लेटफॉर्म पर बिल छूट के लिए बड़ी संख्या में फाइनेंसर होंगे. फैक्टरिंग व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से MSME को फैक्टरिंग लागत कम करने और उनके नकदी प्रवाह के संकट पर काबू पाने में मदद मिल सकती है."

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