Chattisgarh High Court Order: क्या अविवाहित लड़कियाँ भी मांग सकती हैं अपनी शादी का खर्च?

Chattisgarh High Court Order: क्या अविवाहित लड़कियाँ भी मांग सकती हैं अपनी शादी का खर्च?

गुरुवार को ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) ने एक नया फैसला सुनाया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि यह फैसला बेटी के शादी की राशि से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है, कि अविवाहित बेटी हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956) के प्रावधानों के तहत, अपने माता-पिता से शादी के खर्च का दावा कर सकती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि बिलासपुर में उच्च न्यायालय की एक बेंच ने, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की मूल निवासी 35 वर्षीय महिला राजेश्वरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. आपको बता दें, कि न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और न्यायमूर्ति संजय एस अग्रवाल की पीठ ने 21 मार्च को याचिका पर सुनवाई की अनुमति दी थी. इस फैसले में कहा गया है, कि एक अविवाहित बेटी भी हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत अपने माता-पिता से अपनी शादी की राशि का दावा कर सकती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि याचिकाकर्ता, भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के एक कर्मचारी भूनु राम की बेटी है. उसने हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम, 1956 के तहत दुर्ग परिवार अदालत में भी 2016 में एक याचिका दायर की थी. जिसमें उसने यह दावा किया था, कि लगभग 20 लाख रुपए शादी के खर्च के रूप में उसके नाम किए जाएँ. मगर, फैमिली कोर्ट ने 7 जनवरी 2016 को यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया था, कि अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक बेटी अपनी शादी की राशि का दावा कर सकती है.

इसी याचिका पर विचार करते हुए, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है. जिसके जरिए अविवाहित बेटी भी अपनी शादी के खर्च के लिए धन की मांग कर अपना हक़ जता सकती है. गौरतलब है, कि इस फैसले से पहले तक, अविवाहित लड़कियों को यह हक नहीं था.

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