Mission Palm Oil: कैबिनेट ने दी खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की मंज़ूरी

Mission Palm Oil: कैबिनेट ने दी खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की मंज़ूरी

खाद्य तेलों के आयात पर भारी निर्भरता को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने बुधवार को ताड़ के तेल के लिए एक नए मिशन को मंज़ूरी दी है. खाद्य तेलों को राष्ट्रीय मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) या Mission Palm Oil के रूप में जाना जाएगा. इस कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार ने 11,040 करोड़ रुपए जारी किए. इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

कैबिनेट सचिवालय ने जानकारी देते हुए कहा की, "खाद्य तेलों के आयात पर भारी निर्भरता के कारण खाद्य तेलों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने की कोशिश करना ज़रूरी है. इसमें पाम तेल का बढ़ता क्षेत्र और उत्पादकता एक ज़रूरी भूमिका निभाती हैं." भारत ने वित्त वर्ष 2021 में ज़्यादातर इंडोनेशिया और मलेशिया से 5.8 अरब डॉलर के कच्चे तेल और रिफाइंड-दोनों का आयात किया. 

सरकार ने एक प्रेस बयान में कहा कि, "इस तथ्य को देखते हुए कि लगभग 98% कच्चे पाम तेल का आयात किया जा रहा है, इस नई योजना को वित्त वर्ष 26 तक में मौजूदा 3.7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर करने का प्रस्ताव है." Mission Palm Oil के तहत कच्चे पाम तेल का उत्पादन वित्त वर्ष 2026 तक 11.20 लाख टन और वित्त वर्ष 2030 तक 28 लाख टन तक जाने की उम्मीद है. नई केंद्र प्रायोजित योजना के लिए, केंद्र सरकार 8,844 करोड़ रुपए राज्यों में योगदान करने के लिए लगाएगी. जबकि व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण सहित 2,196 करोड़ रुपए है. 

उत्तर-पूर्व और अंडमान में Mission Palm Oil को बढ़ावा देने के लिए सरकार यह सुनिश्चित करेगी की किसानों को भारत के बराबर भुगतान किया जाए. इसके लिए सरकार CPO मूल्य का 2% वहन करेगी. बयान में यह भी कहा गया है कि, "भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित तंत्र को अपनाने वाले राज्यों को योजना में प्रस्तावित व्यवहार्यता अंतर भुगतान से लाभ होगा. जिसके लिए सरकार एक समझौता ज्ञापन भी सौंपेगी."

Related Stories

No stories found.
हिंदुस्तान रीड्स
www.hindustanreads.com