RBI Hikes Repo Rate: बढ़ेंगी बैंकों की ब्याज़ दरें, अब कर्ज़ लेना हुआ महंगा

RBI Hikes Repo Rate: बढ़ेंगी बैंकों की ब्याज़  दरें, अब कर्ज़ लेना हुआ महंगा

आरबीआई (RBI) के गवर्नर, शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने आज ऐलान किया, कि आरबीआई ने रेपो रेट (Repo Rate) और कैश रिजर्व रेश्यो (CRR ) में बदलाव किए हैं. 0.40 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ, रेपो रेट 4.40% हो गया है. वहीं, कैश रिजर्व रेश्यो 0.50% की बढ़ोतरी के साथ, 4.50 प्रतिशत हो गया है, जो कि 21 मई से लागू होगा.

आरबीआई गवर्नर ने बताया, कि यह बदलाव देश में बढ़ती महंगाई, वैश्विक हालातों, रूस यूक्रेन युद्ध को देखते हुए लिया गया है. उन्होंने यह भी कहा, कि ग्लोबल इकोनामी की स्थिति बिगड़ती जा रही है. वहीं, लगातार बढ़ती महंगाई भी चिंता का कारण है. युद्ध की वजह से महंगाई और ग्रोथ का रेश्यो भी बदला है. यह फैसला बदलती परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई एवं एमपीसी, यानी कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC )द्वारा लिया गया है.

क्या होगा आम जनता पर असर

रेपो रेट के बढ़ने से आम जनता पर खासा असर पड़ने वाला है. रेपो रेट के बढ़ते ही बैंकों की ब्याज दरें भी बढ़ेंगी, जिसकी वजह से लोन पर ईएमआई भी बढ़ जाएगी. तो अब आपके होम लोन, कार लोन, आदि की ईएमआई बढ़नी भी तय है. इसका असर नए और पुराने, दोनों तरह के ग्राहकों पर पड़ेगा.

लाल हुआ शेयर बाज़ार

आरबीआई के इस झटके से शेयर बाज़ार में हाहाकार मच गया. आरबीआई गवर्नर की रेपो रेट में बदलाव की घोषणा के बाद, बीएससी (BSE) सेंसेक्स 1011 अंक तक गिर गया. वहीं, निफ्टी (Nifty) 339 अंक पर बिखर गया. दोपहर 2:20 मिनट तक शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नजर आई. जहां, सेंसेक्स 927.76 अंक गिरकर 56,048.23 पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 283.05 अंक लुढ़ककर 16,706.05 अंक नीचे गिर गया. इसी के साथ, बीएसई के ज्यादातर शेयर लाल हो गए और बीएसई के 30 शेयरों में से केवल 5 ही हरे निशान पर रह गए.

मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद, आज बुधवार को एक मजबूत शेयर बाजार की शुरुआत हुई थी. जहां, सेंसेक्स 126 अंकों की बढ़त के साथ खुला, तो वहीं निफ्टी ने भी 20 अंक ऊपर उठकर 17,089.90 अंक पर अपना खाता खोला. लेकिन, रेपो रेट में बदलाव होने के ऐलान की आशंका के बीच, बाजार में गिरावट आनी शुरू हो गई.

क्या होता है रेपो रेट?

आरबीआई जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. जब रेपो रेट बढ़ता है, तब बैंकों को आरबीआई से महंगे रेट पर कर्ज मिलता है. इसी वजह से जब ग्राहक बैंकों से लोन लेते हैं, तब उनके लोन पर ईएमआई की कीमत भी बढ़ जाती है. इसी तरह, जब रेपो रेट घटता है, तब लोन पर ईएमआई भी घट जाती है.

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