PPF Scheme: क्या आप जानते हैं टैक्स बचाने वाली इस स्कीम के बारे में?

PPF Scheme: क्या आप जानते हैं टैक्स बचाने वाली इस स्कीम के बारे में?

पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड को पीपीएफ (PPF) के नाम से भी जाना जाता है. यूँ तो, ये बेहद ही उम्दा बचत स्कीमों में शुमार है. मगर, बहुत ही कम निवेशक इसकी ख़ासियतों से पूरी तरह वाकिफ़ हैं. आइए जानते हैं, कि पीपीएफ की वो कौन-सी खासियतें हैं, जिनके बारे में सभी को जानना चाहिए.

1. ब्याज दर सुनिश्चित मगर फिक्स नहीं

पीपीएफ की ब्याज दर फिक्स नहीं होती, मगर सुनिश्चित ज़रूर होती है. आपको बता दें, कि पीपीएफ की ब्याज दर 10 साल के सरकारी बॉन्ड यिल्ड से जुड़ी होती है. फिलहाल, यह बॉन्ड दर 7.15% है.

2. कार्यकाल बढ़ाना और घटाना

पीपीएफ में अकाउंट के मेच्योर होने पर, पूरा धन निकाला जा सकता है. पर अगर निवेशक चाहें, तो वह धन निकालने के बाद अपने पीपीएफ अकाउंट का कार्यकाल अगले 5 साल के लिए बढ़ा सकते हैं. इसके लिए, निवेशक को केवल पोस्ट ऑफिस या बैंक को अकाउंट मेच्योर होने के 1 साल के अंदर यह लिखना होता है, कि वह अपने पीपीएफ का कार्यकाल बढ़ाना चाहते हैं.

वहीं, अगर निवेशक चाहे तो पीपीएफ को मेच्योर होने से पहले ही अकाउंट को बंद भी कर सकते हैं.

3. लॉक-इन की अवधि 15 साल!

हालांकि, पीपीएफ की निवेश अवधि 15 साल होती है. पर अगर निवेशक चाहे तो, अपने पीपीएफ को ज़रूरत पड़ने पर इमरजेंसी फंड की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पीपीएफ में आप आंशिक विथड्रॉल या निकासी भी कर सकते हैं.

4. सस्ता लोन उपलब्ध

पीपीएफ में निवेश करने के तीसरे और छठे साल में निवेशक, पीपीएफ से लोन भी ले सकते हैं.

5. पीपीएफ में न्यूनतम और अधिकतम निवेश

पीपीफ में न्यूनतम 500 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक का निवेश किया जा सकता है. 500 रुपए का न्यूनतम अमाउंट, 15 साल के बाद अगर अकाउंट चालू रखा जाए, तब भी ज़रूरी होता है.

6. 5वीं तारीख तक निवेश करें

अधिकतर बचत स्कीमों में निवेश की तारीख महीने के बिल्कुल शुरुआत में होती है. मगर पीपीएफ में यह तारीख, 5वीं मानी जा सकती है.

7. टैक्स बचाएँ और लाभ भी पाएं

पीपीएफ में कमाए गए ब्याज पर निवेशकों को किसी भी किस्म का टैक्स देने की ज़रूरत नहीं होती है. उन्हें बस इस ब्याज की आईटीआर फ़ाइल करनी होती है.

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