'Amazon' के साथ नहीं बनी बात, अंबानी की 'RIL' के हाथ होगा भारतीय रिटेल का 'फ्यूचर'

'Amazon' के साथ नहीं बनी बात, अंबानी की 'RIL' के हाथ होगा भारतीय रिटेल का 'फ्यूचर'

मार्च की शुरुआत में रातों रात रिलायंस (Reliance Industries Limited) ने बिग बाज़ार के हज़ारों स्टोर पर अपना अधिकार कर लिया. रिलायंस के मुताबिक, उसने साल 2020 में फ्यूचर ग्रुप के साथ सौदा किया था. गौरतलब है, कि फ्यूचर ग्रुप (Future Group) की कंपनी फ्यूचर रिटेल के पास, बिग बाज़ार (Big Bazaar) के जैसा देश का बड़ा रिटेल ब्रांड है. आपको बता दें, कि इस क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ बहुत पहले से ही अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थी.

सूत्रों के मुताबिक, इसी इच्छा के मद्देनज़र दोनों कंपनियों के बीच 29 अगस्त 2020 को 24,713 करोड़ रूपए का एक सौदा हुआ था. इस सौदे के पूरे होने के बाद, रिलायंस को बिग बाज़ार के साथ-साथ फ्यूचर ग्रुप के एसेसट्स, संपूर्ण रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग बिज़नेस पर भी हक मिला था. दूसरी तरफ हाल ही में, फ्यूचर रिटेल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर जबरन स्टोर पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाया और कहा, कि उसने किसी भी रिटेल यूनिट को रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) को नहीं सौंपा है.

अमेज़न के साथ साल 2019 में हुआ सौदा

अगस्त 2019 में हुए एक सौदे के बाद, अमेज़न (Amazon) और फ्यूचर रिटेल व्यावसायिक भागीदार बने थे. इस सौदे के बाद अमेज़न, फ्यूचर कूपन में लगभग 1,500 करोड़ रुपए ($201 मिलियन) में 49% हिस्सेदारी का भागीदार बना. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि फ्यूचर रिटेल (Future Retail) में फ्यूचर कूपन की 9.82% हिस्सेदारी है, जिससे अमेज़न 4.81% का हिस्सेदार बनता है.

ऐसे में अमेज़न के मुताबिक, यह सौदा 'नॉन- कॉम्पीट क्लॉज' के साथ हुआ था. इसकी वजह से फ्यूचर रिटेल ग्रुप, अमेज़न के कुछ प्रतिद्वंद्वियों को रिटेल एसेसट्स नहीं बेच सकता था. आपको बता दें, कि अमेज़न के करीबी प्रतिद्वंद्वियों में भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी द्वारा संचालित रिलायंस भी शामिल है. ऐसे में फ्यूचर ग्रुप, रिलायंस के साथ सौदा नहीं कर सकता था. वहीं इन दोनों के बीच अगर कोई विवाद होगा, तो वो सौदे की शर्तों के मुताबिक सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में निपटाया जाएगा.

साल 2020 में रिलायंस ने मारी एंट्री

साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान हुई आर्थिक तंगी के चलते फ्यूचर ने अपने एसेसट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को बेचने का निर्णय लिया था. इसके बाद, अमेज़न ने सिंगापुर के मध्यस्थों से संपर्क किया और बिक्री को सफल रूप से रोक दिया. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि अमेज़न साल 2020 से ही फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस के साथ मुकदमेबाज़ी में है और अब तक, रिलायंस को फ्यूचर की 24,500 करोड़ रुपए की रिटेल चेन की बिक्री को रोक चुका है.

वहीं, दोनों पक्षों ने भारतीय मुख्य अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में भी एक-दूसरे को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर-अमेज़न को 'आउट-ऑफ़-कोर्ट सेटलमेंट' का सुझाव दिया था, जहां दोनों ही पक्ष इस पर सहमत हो गए थे. मगर दोनों पक्षों ने 15 मार्च, 2022 को भारतीय सुप्रीम कोर्ट को बताया, कि वह इस मामले को अब तक सुलझा नहीं पाए हैं.

विवाद ने लिया नया मोड़

मार्च 2021 की शुरुआत में रिलायंस के बिग बाज़ार पर कब्ज़ा कर लेने से फ्यूचर और अमेज़न का यह विवाद, अब अमेज़न और रिलायंस विवाद की तरफ अपना रुख मोड़ चुका है. चूंकि अगर देखा जाए तो असल में अमेज़न और रिलायंस, दोनों ही भारत के रिटेल बाज़ार में खुद को टॉप पर लाना चाहते हैं. इसके चलते, रिलायंस ने बिग बाज़ार पर कब्ज़ा करते हुए वहाँ का सारा काम खुद संभाल लिया है.

वहीं दूसरी तरफ, अमेज़न भी रिटेल बाज़ार में टॉप पर आने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है और इससे पीछे हटता भी नज़र नहीं आ रहा है. इस तरह से, अब फ्यूचर ग्रुप के साथ विवाद में अमेज़न जीतता भी है, तो रिलायंस उसके सामने तगड़े विवाद के लिए खड़ा है.

रिलायंस: आखिरी विजेता?

रिलायंस का कहना है, कि फ्यूचर ग्रुप ने सालों से किराये का भुगतान नहीं किया है. इसके साथ ही, रिलायंस के मुताबिक फ्यूचर रिटेल के किराया न चुकाने के चलते, उसने स्टोरों को अपने कब्ज़े में ले लिया. मगर असल में उसने केवल अपनी संपत्तियों को वापस लिया है. इस प्रकार यह लड़ाई, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अमेज़न के बीच भारत में रिटेल पर वर्चस्व को लेकर चल रही है. इसके चलते फ्यूचर ग्रुप के बिग बाज़ार की स्थिति अच्छी नज़र नहीं आ रही.

फ़िलहाल यह देखना दिलचस्प होगा, कि अब जब रिलायंस बिग बाज़ार पर कब्ज़ा कर चुका है, तो क्या अमेज़न का इस विवाद में जीतना उसे सच में कोई जीत दिला पाएगा या नहीं?

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