RBI MPC Meeting: क्या और बढ़ेगा EMI का बोझ ? रेपो रेट में इतने फीसदी का इज़ाफा कर सकती है शीर्ष बैंक

RBI MPC Meeting: क्या और बढ़ेगा EMI का बोझ ? रेपो रेट में इतने फीसदी का इज़ाफा कर सकती है शीर्ष बैंक

देश में इस समय मुद्रास्फीति में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. जिसको देखते हुए ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है, कि आज सोमवार को होने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) और मौद्रिक समीक्षा नीति (MPC Meeting) की बैठक के बाद, सरकार नीतिगत दरों में इजाफा कर सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है, गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) पहले ही इसके संकेत दे चुके हैं. आपको बता दें, कि गवर्नर दास के नेतृत्व वाली एमपीसी की तीन दिन की बैठक आज सोमवार से शुरू होगी. बैठक के दौरान लिए गए फैसलों की घोषणा गवर्नर बुधवार, 8 जून को करेंगे.

0.35 फीसदी की हो सकती है बढ़ोतरी

ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं, कि आरबीआई नीतिगत ब्याज दरों में कम से कम 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकती है. वहीं, पिछले माह बुलाई गई आपातकालीन बैठक में एमपीसी ने 40 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी. वहीं, विशेषज्ञ भी अगले महीने रेपो रेट (Repo Rate) में और वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं. उनका यह भी मानना है, कि समिति की बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा खुदरा मुद्रास्फीति पर हो सकती है. आपको बता दें, कि महंगाई की मुख्य वजह कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में तेजी है.

टमाटर ने बढ़ाई महंगाई

इस बीच, बोफा सिक्योरिटीज (BofA Securities) का कहना है, कि टमाटर की कीमतों की वजह से मई में फिर से महंगाई बढ़ी है. मुख्य महंगाई दर 7.1% पर पहुंच गई है. ऐसे में आरबीआई का ब्याज दर बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, बोफा सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि उसे उम्मीद है कि आरबीआई जून में रेपो दर में 0.40 फीसदी और अगस्त में 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी करेगी.

रिपोर्ट के अनुसार, अगर रेपो रेट में इसी तरह और बढ़ोतरी होती रही, तो आने वाले दिनों में आम आदमी के लिए लोन की ईएमआई का बोझ और बढ़ने की संभावना है. वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 में खुदरा महंगाई दर औसतन 6.8% पर रह सकती है, जो आरबीआई के 2 से 6 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर है. अगर महंगाई दर ऊंची बनी रहती है, तो आरबीआई चालू वित्त वर्ष में ब्याज दरों को 5.65% तक ले जा सकती है. अभी रेपो रेट 4.40% पर है.

पेट्रोल-डीजल पर शुल्क में हुई कटौती

आपको बता दें, कि सरकार ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए हाल ही में पेट्रोल-डीजल के शुल्क पर कटौती की है. इसके अलावा, सरकार ने कुछ खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कमी करके और गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर मुद्रास्फीति को कम करने का प्रयास किया है.

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