Swami Vivekananda Jayanti: जब नौकरी न मिलने पर स्वामी जी का उठा भगवान से विश्वास

Swami Vivekananda Jayanti: जब नौकरी न मिलने पर स्वामी जी का उठा भगवान से विश्वास

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत माने जाने वाले Swami Vivekananda का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था. उनके पिता विश्वनाथ दत्त, कलकत्ता हाई कोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे, जिन्होंने हमेशा अपने पुत्र Swami Vivekananda को पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण करने की सलाह दी थी. उनका सपना था, कि स्वामी जी भी उनकी तरह अंग्रेज़ी सीखकर एक बड़े आदमी बनें.

आज Swami Vivekananda जी की 159वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए हम आपके लिए लाए हैं, उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य. तो आइये जानें उनसे जुड़ी यह बातें.

1. Swami Vivekananda का असली नाम Narendra Nath Datta था, जिन्हें नरेन के नाम से भी जाना जाता था. वहीं बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वामी जी का शैक्षिक प्रदर्शन औसत था. उनको यूनिवर्सिटी में अपनी प्रवेश स्तर की परीक्षा में केवल 47 फीसदी, BA में 56 फीसदी और MA में केवल 46 फीसदी अंक ही प्राप्त हुए थे.

2. अपनी बुद्धिमानी से अपना लोहा मनवाने वाले Swami Vivekananda, चाय के बहुत शौकीन थे. आपको बता दें, कि उन दिनों जब हिंदू पंडित चाय विरोधी हुआ करते थे, उन्होंने तब अपने मठ में चाय को बढ़ावा दिया था.

3. Swami Vivekananda के मठ में किसी महिला, यहाँ तक की उनकी मां को भी जाने की अनुमति नहीं थी. वहीं एक बार जब उनको काफी बुखार था, तब उनके एक शिष्य ने उनकी मां को बुलाया, जिसके कारण वह अपने शिष्यों पर काफी गुस्सा हुए थे. उन्होंने अपने शिष्यों से कहा था, कि “तुम लोगों ने एक महिला को अंदर आने की अनुमति कैसे दी? मैंने ही यह नियम बनाया था और मेरे लिए ही इस नियम को तोड़ा जा रहा है.”

4. खेतरी के महाराजा अजित सिंह, Swami Vivekananda की मां को नियमित रूप से 100 रुपये भेजा करते थे, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से किसी भी तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े.

5. BA की डिग्री होने के बावजूद, Swami Vivekananda को रोज़गार की तलाश में घर-घर जाना पड़ता था. वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर यह कहा करते थे, कि 'मैं बेरोज़गार हूं'. जब वह नौकरी की तलाश करते-करते थक गए, तब उनका भगवान से भरोसा उठ गया और वह लोगों से यह कहने लगे, कि “भगवान का कोई अस्तित्व नहीं है.”

6. अपनी मौत से 2 साल पहले, जब वह सन 1900 में यूरोप से आखिरी बार भारत आए, तब Swami Vivekananda सबसे पहले बेलूर गए, ताकि वह अपने शिष्यों के साथ समय बिता सकें. उन्होंने वहां पहुंचकर सुना, कि अंदर रात का खाना चल रहा है, मगर दरवाजे़ पर ताला लगा देख, वह गेट के ऊपर से चढ़ कर अंदर गए. उन्होंने अंदर पहुंचकर, अपना पसंदीदा व्यंजन खिचड़ी खाई.

7. अमेरिका के आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में हुई धर्म संसद में, जब Swami Vivekananda ने अमेरिका के भाइयों और बहनों के संबोधन से भाषण दिया, तो पूरे 2 मिनट तक वहां तालियां बजती रहीं. 11 सितंबर, 1893 का वह ऐतिहासिक द‍िन, हमेशा के ल‍िए इतिहास की किताब में दर्ज हो गया.

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