Zombie Virus News: झील के नीचे मिला 48 हज़ार साल से भी पुराना वायरस

Zombie Virus News: झील के नीचे मिला 48 हज़ार साल से भी पुराना वायरस
Jane Barlow - PA Images

ग्लोबल वार्मिंग सहित बहुत से कारण से होने वाले जलवायु परिवर्तन से कई विनाशकारी परिणाम सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक परिणाम है, पृथ्वी की बर्फ की चोटियों का पिघलना. वहीं, ग्लेशियरों और अन्य बर्फ से ढके क्षेत्रों के पिघलने से अब ऐसी चीज़ें निकल रही है, जो लाखों सालों से जमी हुई थीं. गौरतलब है, कि वैज्ञानिकों ने फिलहाल कई ‘ज़ोंबी वायरस’ (Zombie Virus) को पुनर्जीवित किया है जो इंसानों के लिए एक बड़ा खतरा है.

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (French National Centre for Scientific Research) और उनकी टीम के माइक्रोबायोलॉजिस्ट जीन-मैरी एलेम्पिक (Jean-Marie Alempic) के द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका में ऐसा कहा गया है, कि रिएनिमेटिंग वायरस लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक संभावित खतरा हैं. इसके साथ ही, इन संक्रामक खतरों की सीमा का आकलन करने के लिए आगे और भी अध्ययन करने की जरूरत है.

एलेम्पिक ने वैज्ञानिकों की अपनी टीम के साथ 7 अलग-अलग पुराने साइबेरियाई पर्माफ्रॉस्ट नमूनों से अलग 13 नए विषाणुओं की विशेषता बताई है. इनमें से पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र में एक झील के नीचे 48,500 साल पुराना अमीबा विषाणु (Amoeba Virus) भी मिला है, जो अन्य जीवों को संक्रमित करने में सक्षम हैं. वहीं, साइंटिस्ट ने 'साइंस अलर्ट' नाम की पत्रिका में यह भी कहा, कि “एक पुराने अज्ञात वायरस के पुनरुद्धार के कारण पौधे, जानवर या मानव रोगों के मामले में स्थिति बहुत अधिक विनाशकारी हो सकती है.”

वैज्ञानिकों के अनुसार, सभी जोंबी वायरस के अधिक संक्रामक होने की क्षमता है और इसीलिए यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. इसके साथ ही, भविष्य में कोविड-19 (Covid-19) महामारी अधिक आम हो जाएगी क्योंकि पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाले वायरस निकलते हैं.

फिलहाल भारत में कोविड-19 से सुरक्षा के लिए बहुत से प्रभावशाली वैक्सीन मौजूद हैं. इनमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से बनी कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं.

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