Chaitra Navratri 2022: क्या विज्ञान में छिपे हैं नवरात्रि मनाने के राज़? जानें इसके पीछे का महत्व

Chaitra Navratri 2022: क्या विज्ञान में छिपे हैं नवरात्रि मनाने के राज़? जानें इसके पीछे का महत्व

भारत में चैत्र नवरात्रि 2022 (Chaitra Navratri 2022) की शुरुआत 2 अप्रैल से हो चुकी है, जो पूरे 9 दिनों तक चलेगी. इन 9 दिनों तक, माता भगवती की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है. यूँ तो नवरात्रि के दौरान, पूजा-पाठ, कन्या-पूजन और व्रत रखा जाता है. मगर क्या आप जानते हैं, कि नवरात्रि का पावन पर्व और इस दौरान लहसुन-प्याज़ न खाना के पीछे विज्ञान छिपा है. जी हाँ, आइए जानते हैं कि नवरात्रि मनाने के पीछे क्या साइंस है?

नवरात्रि के दौरान, आमतौर पर केवल फल-सब्ज़ियां, कुट्टू का आटा, साबू दाना, समाक चावल, सेंधा नमक और दूध से बनी चीज़ों का ही खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. वहीं दूसरी तरफ, लहसुन और प्याज़ खाने की बिल्कुल मनाही होती है. जो लोग व्रत रखते हैं और जो व्रत नहीं भी रखते हैं, दोनों ही नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज़ खाने से बचते हैं और न ही इसे खाने में इस्तेमाल करते हैं.

नवरात्रि में लहसुन-प्याज़ न खाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

आपको बता दें, कि आयुर्वेद भी विज्ञान का ही एक रूप है, जिसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करते हुए बीमारी का उपचार किया जाता है. वहीं आयुर्वेद को अपनाकर, लंबे समय तक स्वस्थ भी रहा जा सकता है. नवरात्रि मनाने का आधार भी इसी आयुर्वेद के विज्ञान से जुड़ा हुआ है. आयुर्वेद के अनुसार, नवरात्रि के खाने को 3 तरह की कैटेगरी में बाँट सकते हैं. पहला सात्विक, दूसरा तामसिक और तीसरा रजस.

गौरतलब है, कि लहसुन और प्याज़ तामसिक खाने में आते हैं, जो मन को बेचैन कर सकते हैं, जबकि नवरात्रि में केवल वही खाना खाया जाता है, जिससे मन शांत रहे. ऐसा कहा जाता है, कि मन केवल सात्विक खाना खाने से शांत रहता है. इसलिए नवरात्रि के दौरान, लहसुन-प्याज़ और ज्यादा तीखा-चटपटा खाना छोड़कर सादा खाना ही अच्छा माना जाता है. अब यह तो रही लहसुन-प्याज़ न खाने की बात. मगर इसके साथ ही, नवरात्रि मनाने के पीछे भी विज्ञान है.

नवरात्रि साल में दो बार आती है, एक चैत्र नवरात्रि और दूसरी शरद नवरात्रि. चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल के महीने में मनाई जाती है, तो वहीं शरद नवरात्रि अक्टूबर-नवंबर के महीने में आती है. गौरतलब है, कि चैत्र और शरद दोनों ही ऐसे महीने हैं, जिसमें मौसम का एक बड़ा बदलाव होता है.

आपको बता दें, कि मौसम में आने वाले बदलाव इसी बदलाव से हमारी इम्युनिटी घटने लगती है. ऐसे में शरीर को फिर से ऊर्जावान बनने और पाचन तंत्र को बढ़ाने के लिए, शरीर को आराम की ज़रूरत होती है. शरीर को आराम देने के लिए, आसानी से पचने वाले और मन को शांत रखने वाले खाने से ज़्यादा अच्छा और कुछ नहीं हो सकता. तो बस इसी मौसम के परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए, नवरात्रि मनाने का चलन शुरु हुआ.

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