Measles Outbreak In Mumbai: अब तक 14 बच्चों की मौत, जानिए बीमारी के लक्षण

Measles Outbreak In Mumbai: अब तक 14 बच्चों की मौत, जानिए बीमारी के लक्षण
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महाराष्ट्र का मुंबई शहर अभी कोरोना (Covid 19) के कहर से उभरा ही था, कि इसी बीच वहाँ के लोगों को एक और खतरनाक बीमारी, खसरे (Measles) का सामना करना पड़ गया. अब तक इस बीमारी से शहर के लगभग 14 बच्चों ने जान गंवाई, जिसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने दिशा निर्देश जारी करते हुए, 1 दिसंबर से पूरे महाराष्ट्र में बूस्टर डोज़ लगवाने का ऐलान किया.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार तक जहाँ मुंबई में करीब 303 लोग इस बीमारी का शिकार बने, तो वहीं करीब 4602 संदिग्ध मामले भी इसी दिन पाए गए. वहीं कुल 8 लोगों ने इसी दिन खसरे की चपेट में आकर अपनी जान भी गंवा दी. वहीं बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की माने, तो इतनी तेजी से इस बीमारी के फैलने की सबसे बड़ी वजह है, बच्चों के टीकाकरण में आई कमी. उनका कहना है, कि पिछले दो सालों में कोरोना के प्रकोप की वजह से ज़्यादातर बच्चों ने खसरे का टीका नहीं लगवाया. इसी आँकड़े को देखते हुए, अब बीएमसी उन घरों का सर्वे करेगी, जहाँ के बच्चों को अब भी टीकाकरण की जरूरत है.

क्या है बीमारी के लक्षण?

रूबेला (Rubella) वायरस से होने वाली खसरे की बीमारी के लक्षणों की बात की जाए, तो इस बीमारी में बुखार, सर्दी, सिरदर्द और कमजोरी क्व साथ ही, बच्चे के शरीर पर सैंकड़ों लाल दाने देखे जाते हैं. वहीं इस बीमारी का खतरा सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को भी रहता है. एक बार संक्रमित होने पर यह संक्रमण 3 से 5 दिन तक मरीज़ के शरीर में रहेगा.

कैसे करें इलाज?

क्योंकि खसरे को एक संक्रामक बीमारी भी माना गया है, इसलिए इसका सबसे बड़ा इलाज है बचाव और सही समय पर टीकाकरण. फ़िलहाल मुंबई में बढ़ते खतरे को देखते हुए, महाराष्ट्र की सरकार भी इसी कोशिश में लगी हुई है, कि राज्य के लगभग हर बच्चे के टीकाकरण को संभव किया जा सके.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने भी खसरे के टीकाकरण से जुड़ा एक चौंकाने वाला आंकड़ा लोगों के सामने रखा था. इस आँकड़े के मुताबिक, पिछले साल दुनिया के करीब 40 मिलियन बच्चों ने खसरे का टीकाकरण नहीं करवाया. वहीं महाराष्ट्र सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अब यही कोशिश है, कि ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित किया जा सके.

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