Republic Day 2023: यहाँ जाने गणतंत्र दिवस परेड के बारे में 5 रोचक तथ्य

Republic Day 2023: यहाँ जाने गणतंत्र दिवस परेड के बारे में 5 रोचक तथ्य

यह हर साल भारत का गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है और इस साल भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. इस दिन भारत के राष्ट्रपति राष्ट्र को संबोधित करते हैं. यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सैन्य कौशल की विशाल छवि को भी दर्शाता है. इस बार 26 जनवरी 2023 (Republic Day 2023) को भी गणतंत्र दिवस परेड (Republic Day Parade) बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी.

26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान देश में लागू हुआ था, इसलिए हम हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं. 26 जनवरी 2023 को गणतंत्र दिवस परेड में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और 9 मंत्रालयों और विभागों को अपनी झांकी दिखाने के लिए चुना गया है. इनमें अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, मेघालय, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं.

26 जनवरी की परेड के बारे में 5 रोचक तथ्य

1. जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि हर साल 26 जनवरी को परेड का आयोजन नई दिल्ली स्थित राजपथ (Rajpath) पर किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं, कि 1950 से 1954 तक राजपथ परेड का आयोजन केंद्र नहीं था? इन वर्षों के दौरान, 26 जनवरी की परेड कभी इरविन स्टेडियम (Irvin Stadium) (अब नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे (Kingsway), लाल किला (Red Fort) और रामलीला मैदान (Ramleela Maidan) में भारत सरकार द्वारा आयोजित की गई थी.

1955 ई. में 26 जनवरी की परेड के लिए राजपथ स्थायी स्थल बन गया. उस समय राजपथ को 'किंग्सवे' के नाम से जाना जाता था, जिसे अब कर्तव्यपथ (Kartavya Path) के नाम से जाना जाता है.

2. 26 जनवरी को परेड कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति के आगमन के साथ होती है. सबसे पहले राष्ट्रपति के घुड़सवार अंगरक्षक राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हैं. इस दौरान राष्ट्रगान बजाया जाता है और 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं, कि फायरिंग 21 तोपों से नहीं की जाती है. इसके बजाय भारतीय सेना के 7-तोपों, जिन्हें "25-पॉन्डर्स" के रूप में जाना जाता है, का उपयोग 3 राउंड में फायरिंग के लिए किया जाता है.

दिलचस्प तथ्य यह है, कि तोपों की सलामी का समय राष्ट्रगान बजने के समय से मेल खाता है. पहली फायरिंग राष्ट्रगान की शुरुआत में होती है और आखिरी फायरिंग ठीक 52 सेकंड के बाद होती है. ये तोपें 1941 में बनी थीं और सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों में शामिल होती हैं. 

3. परेड के सभी प्रतिभागी 2 बजे तैयार हो जाते हैं और 3 बजे तक राजपथ पर पहुंच जाते हैं. लेकिन परेड की तैयारी पिछले साल जुलाई में शुरू होती है, जब सभी प्रतिभागियों को उनकी भागीदारी के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया जाता है. अगस्त तक वह अपने संबंधित रेजीमेंट केंद्रों पर परेड का अभ्यास करते हैं और दिसंबर तक दिल्ली पहुंच जाते हैं. प्रतिभागी 26 जनवरी को औपचारिक रूप से प्रदर्शन करने से पहले ही, 600 घंटे का अभ्यास कर लेते हैं.

4. भारत की सैन्य शक्ति को दर्शाने वाले सभी टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक उपकरणों के लिए इंडिया गेट (India Gate) के परिसर के पास एक विशेष शिविर का आयोजन किया जाता है. प्रत्येक तोप की जांच प्रक्रिया और सफेदी का काम ज़्यादातर 10 चरणों में होता है, लेकिन इस बार शायद यह अलग होगा.

5. इस आयोजन का सबसे आकर्षक हिस्सा "फ्लाईपास्ट" है. "फ्लाईपास्ट" की ज़िम्मेदारी पश्चिमी वायु सेना कमान की होती है, जिसमें लगभग 41 विमानों की भागीदारी शामिल है. परेड में शामिल विमान एयरफोर्स के अलग-अलग केंद्रों से उड़ान भरते हैं और तय समय पर राजपथ पर पहुंचते हैं.

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