Sivaji Ganesan: 93वें जन्मदिन पर तमिल फिल्मों के महान अभिनेता को गूगल की श्रद्धांजलि

Sivaji Ganesan: 93वें जन्मदिन पर तमिल फिल्मों के महान अभिनेता को गूगल की श्रद्धांजलि

आज शुक्रवार, 1 अक्टूबर को दिवंगत अभिनेता Sivaji Ganesan की 93वीं जयंती है. Google ने महान अभिनेता को Doodle बनाकर श्रद्धांजलि पेश की है. अभिनेता के पोते, अभिनेता Vikram Prabhu ने ट्विटर पर यह डूडल साझा किया. उन्होंने अपने ट्वीट पर लिखा कि, #Googledoodle महानायक #SivajiGanesan को उनके 93वें जन्मदिन पर सम्मानित कर रहा है. Doodle के लिए Google India के लोगों और उनके अतिथि कलाकार Noopur Rajesh Choksi की उन्होंने सराहना की. उन्होंने कहा, कि यह एक गर्व का क्षण है. ऐसे ही Sivaji Ganesan को प्यार करो और हर साल उन्हें और अधिक याद करो. 

आपको बता दें कि, आज ही के दिन 1928 में, Sivaji Ganesan का जन्म भारत के तमिलनाडु के दक्षिणपूर्व के एक शहर विल्लुपुरम में हुआ था. उनका बचपन का नाम गणेशमूर्ति था. इस महान कलाकार ने 7 साल की छोटी उम्र में, अपना घर छोड़ दिया और एक थिएटर ग्रुप में शामिल हो गए. जहां उन्होंने बाल और महिला की भूमिकाएं निभाना शुरू किया. फिर बाद में उन्होंने मुख्य भूमिकाएं भी निभाई थीं. दिसंबर 1945 में, गणेशमूर्ति ने, Shivaji Kanda Hindu Rajyam नामक एक नाटक में मराठा शासक शिवाजी का अभिनय किया. इस नाटक में बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उनके नाम के साथ "शिवाजी" नाम जोड़ दिया गया. गणेशमूर्ति ने "शिवाजी" का उपनाम अर्जित किया, इसी वजह से जीवन भर उन्हें इस नाम से जाना गया. 

Sivaji Ganesan मुख्य रूप से तमिल सिनेमा में सक्रिय थे, जहां उन्होंने 1952 की फिल्म Parasakthi में अपनी शुरुआत की. गणेशन लगभग 300 फिल्मों में दिखाई दिए, जिनमें तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी जैसी भाषाओं में भी शामिल हैं. उनकी सबसे प्रसिद्ध ब्लॉकबस्टर 1961 की फिल्म "Pasamalar" है. जो एक भावनात्मक पारिवारिक कहानी पर आधारित है. जिसे तमिल सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियो में से एक माना जाता है. इसके अलावा 1964 की फिल्म "Navrathi", Sivaji Ganesan की 100वीं फिल्म थी. जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड-तोड़, नौ अलग-अलग भूमिकाएं निभाई थीं. 

आपको बता दें, कि लगभग पांच दशक के करियर में, उन्होंने कई पुरस्कार जीते थे. 1960 में, Sivaji Ganesan, अपनी ऐतिहासिक फिल्म "Veerapandiya Kattabomman" के लिए एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय बने. यह फिल्म आज भी उनकी सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक है. 1995 में, फ्रांस ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान, शेवेलियर ऑफ़ द नेशनल ऑर्डर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया. 1997 में भारत सरकार ने उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया, जो सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च पुरस्कार है. 

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