Portrayal Of Women In Bollywood: जहां कभी हीरो से होती थी इंडस्ट्री की पहचान, वहीं अब हीरोइनों ने संभाली है कमान

Portrayal Of Women In Bollywood: जहां कभी हीरो से होती थी इंडस्ट्री की पहचान, वहीं अब हीरोइनों ने संभाली है कमान

'एक नारी ठान ले, तो कुछ भी कर सकती है', आज के समय में इस वाक्य का यथार्थ उदहारण हमें हर क्षेत्र में देखने को मिल जाता है. फिर चाहे वो राजनीति हो या व्यापार, कहीं भी महिलाएं आज पुरुषों से कम नहीं हैं. ऐसा ही एक क्षेत्र है Bollywood, जहां महिलाओं की उपस्थिति तो शुरुआत से ही रही है, लेकिन उन्हें बराबर की भागीदारी अब धीरे-धीरे मिलने लगी है. हिंदी फिल्मों में एक समय ऐसा भी था, जब नायकों के नाम पर ही फिल्में चलती थीं. हालांकि, उस वक्त भी नायिका की उपस्थिति उन फ़िल्मों में हीरो की मां, पत्नी या प्रेमिका के रूप में होती ज़रूर थी. लेकिन वहीं बदलते समय के साथ-साथ महिलाओं की भूमिका भी Bollywood में परिवर्तित होती दिखाई देने लगी.

कला आलोचना पर अपने साल 1972 के निबंध में अंग्रेज़ी कला समीक्षक और उपन्यासकार John Berger ने एक बार कहा था कि, "Bollywood की फ़िल्मों में पुरुष अभिनय करते हैं और महिलाएं सिर्फ दिखती हैं. पुरुष उन्हें देखते हैं, तो महिलाएं उन्हें खुद को देखते हुए देखती हैं." हिंदी सिनेमा के इस उदाहरण को आज महिलाएं बदलने में सफल रही हैं. चाहे निर्देशक की भूमिका हो या लेखिकाओं की या फिर मुख्य धारा की अभिनेत्रियों की, महिलाएं अब किसी से भी पीछे नहीं हैं. आज हम आपके सामने युगों के आधार पर महिलाओं की बॉलीवुड में बदलती हुई छवि के स्वरूपों को रखने का प्रयास करेंगे.

1950-60 के दशक की Bollywood फ़िल्मों में महिलाओं की भूमिका

'तारों की धीमी रोशनी सी चमकती है नारी', Bollywood के 100 साल के सुनहरे सफर की शुरुआत इसी दशक से हुई. इस दशक ने जहां हिंदी सिनेमा की नींव रखी, वहीं नारी की खूबसूरती को भी इस दशक में विभिन्न रंगों में ढाला गया. Dilip Kumar और Raj Kapoor जैसे दिग्गज अभिनेता इस दशक में दर्शकों पर अपना जादू चलाते थे. वहीं इस दशक की अभिनेत्रियों को फ़िल्मों का अलंकार बना कर रखा जाता था. लेकिन इस ढांचे को तोड़ा Meena Kumari, Madhubala और Nargis जैसी अभिनेत्रियों ने, जिन्होंने अपनी अदाकारी से इन बड़े अभिनेताओं को कड़ी टक्कर दी. सशक्त नारी के किरदार में साल 1957 की फ़िल्म Mother India में Nargis का अभिनय अतुलनीय था.

1970-80 के दशक की अभिनेत्रियां 

Bollywood के लिए यह दशक काफ़ी महत्वपूर्ण रहा. इसी दशक में धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा को अंतराष्ट्रीय पहचान मिलने की शुरुआत हुई. इस दौर में Amitabh Bachchan, Shashi Kapoor, Jeetendra, Shatrughan Sinha जैसे अभिनेताओं का ही बोलबाला था. नायकों के बस नाम पर फिल्में हिट या फ्लॉप हो जाती थीं. इस दशक ने महिलाओं को अपने बच्चों से बेहद प्यार करती मां, आदर्श पत्नी या प्रेमिका के रूप में ही देखा. Waheeda Rehman, Asha Parekh, Jaya Bachchan, Hema Malini, Rekha, Zeenat Aman जैसी अभिनेत्रियों को इन भूमिकाओं में देखा गया. 

1980-90 के दशक में थोड़ा बदला स्वरूप

इस दशक में Bollywood की मुख्य धारा की भूमिकाओं में थोड़ा फेर बदल देखा गया था. इस दशक में जहां अब भी अभिनेताओं का इंडस्ट्री पर दबदबा बरकरार था, वहीं Masoom, Khoon Bhari Maang, Chandni जैसी फिल्मों ने सक्रिय मर्दाना अभिनय के सामने करारी चुनौती पेश की थी. Rekha, Sridevi जैसी अदाकाराओं ने एक ऐसा वक्त भी दिखाया जब अभिनेत्रियों के नाम से भी फिल्में हिट हो जाती थीं.

1990-10 में चला रोमांस और आइटम नंबर का दौर 

80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत के बीच Ghar Ho Toh Aisa जैसी कुछ फिल्में ऐसी भी आईं, जिनमें औरत को पूरे घर का मुखिया दिखाया तो गया, लेकिन उस महिला पर मगरुर औरत होने का टैग, साथ ही उसके पति को दुर्बल भी दर्शाया गया. वहीं मध्य 90s में युवा रोमांस शैली का उद्भव हुआ. अगले 10 साल तक अभिनेत्रियों के पास अपने अभिनय का कौशल दिखाने का मौका बहुत कम रह गया. Madhuri Dixit, Shilpa Shetty, Kajol, Juhi Chawla आदि अभिनेत्रियां इस दौरान खूब चर्चा में आईं. लेकिन Aamir Khan, Shahrukh Khan, Akshay Kumar, Suneil Shetty जैसे हीरोज़ ने ही इस दौर में फ़िल्मों को चलाया. हालांकि साल 1993 की फ़िल्म Damini में Meenakshi Sheshadri और 2007 की Aaja Nachle जैसी फ़िल्मों ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि, फ़िल्मों में पुरुष चरित्र भी कभी-कभी सिर्फ़ सहायक कलाकार बन सकता है.

2010-20 में Bollywood में बदली हिरोइनों की परिभाषा 

यह दौर Bollywood में महिलाओं की अवधारणा के अहम बदलाव का दौर रहा. इस दौरान सिर्फ अभिनेत्रियां ही नहीं, कई महिला निर्देशक, लेखिकाएं और कोरियोग्राफर्स भी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने लगीं. वहीं Neerja, Piku, NH10, Mary Kom, Highway, Queen, Raazi, Chhapaak, Thappad के अलावा और भी कई फिल्में ऐसी बनी, जो केवल महिलाओं पर केंद्रित थीं. इन फिल्मों के किरदारों को पूरी ताकत से निभाते हुए अभिनेत्रियों ने यह साबित कर दिया कि, फ़िल्मों को चलाने के लिए हमेशा हीरो की ज़रूरत नहीं होती.

इन बातों को मद्देनजर रखते हुए कहा जा सकता है कि, हाल के समय में महिलाओं के लिए एक अनोखा खुशी का दौर सामने आया है. क्योंकि अब दर्शकों को सिनेमाघरों की तरफ आकर्षित करने के लिए पुरुष सुपरस्टार्स की ज़रूरत नहीं पड़ती. Priyanka Chopra, Deepika Padukone, Taapsee Pannu, Alia Bhatt जैसी अदाकाराओं ने यथार्थ रूप से इस बात को साबित कर दिया है.

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