Sonu Sood: ‘पिछले ढाई सालों में लोगों से मिलकर खुद को जानने का मौका मिला’

Sonu Sood: ‘पिछले ढाई सालों में लोगों से मिलकर खुद को जानने का मौका मिला’

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कोविड-19(Covid-19) लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर देश भर में लोगों की मदद करने वाले अभिनेता सोनू सूद(Sonu Sood) को ‘CNN-News18 इंडियन ऑफ़ दि ईयर 2022’ अवार्ड से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह अवार्ड ‘स्पेशल अचीवमेंट’ कैटेगरी के अन्दर दिया गया है. आपको बता दें, कि लॉकडाउन के दौरान अभिनेता सोनू सूद ने बहुत से ज़रूरतमंद लोगों की पैसों, भोजन और बस सेवाओं के माध्यम से मदद की थी, जिसके कारण उन्हें यह अवार्ड दिया गया है.

केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी के द्वारा अवार्ड मिलने पर सोनू ने कहा, ‘मैं इस अवार्ड के लायक हूँ या नहीं ये मैं नहीं जानता. लेकिन हाँ, नितिन गडकरी जी के हाथों से इस अवार्ड को लेना मेरे लिए सच में एक बहुत ही सम्मान भरी बात है. मैंने अपनी इंजीनियरिंग नागपुर से की थी और इसीलिए मेरा और गडकरी जी का एक नागपुर कनेक्शन भी है’. अभिनेता सोनू सूद ने आगे कहा कि ‘पिछले ढाई सालों में लाखों लोगों से जुड़ने के बाद मैंने खुद को ढूंढ लिया. 100-200 करोड़ की कोई भी फिल्म आपको ऐसी ख़ुशी नहीं देती, जैसी ख़ुशी इन अनजान लोगों से जुडकर उनके चेहरों पर मुस्कराहट लाने में होती है’.

केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी से जब पूछा गया, कि अभिनेता सोनू सूद की समाज सेवा को देखते हुए आगे आने वाले सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन कैसे हो सकते हैं? तो उन्होंने कहा कि राजनीति का असली मतलब वह समाज सेवा ही है जो अभिनेता कर रहे हैं. इस बारे में आगे बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि “महात्मा गाँधी के सिद्धांत के अनुसार, राजनीति का असली मतलब समाज सेवा ही है. जब मैं भाजपा अध्यक्ष था तो मैंने सभी विधायकों और सांसदों से विनती की थी कि वे कोई न कोई सामजिक कार्य ज़रूर करें. सोनू जो कर रहे हैं वह राष्ट्र सेवा है’.

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि आज भी मुंबई में सोनू सूद के घर के बाहर ज़रुरतमंदों की भीड़ देखि जा सकती है, जो उनसे मदद की उम्मीद लगाए हुए है. अभिनेता ने इस सन्दर्भ में एक वाकया बताया. एक बार एक फिल्म निर्देशक उनसे मिलने उनके घर आये तो अभिनेता सोनू सूद अपने घर के बाहर खड़े लोगों से मिलने की व्यस्तता में उन फिल्म निर्देशक से मिलना भूल गए. सोनू आगे बताते हैं, कि वह निर्देशक तो चले गए लेकिन, उन्होंने सोनू के लिए एक लिखित सन्देश छोड़ा जिसमें लिखा था कि उन्हें फिल्म बनाने से कहीं ज्यादा ख़ुशी सोनू के घर के आगे खड़ी भीड़ देखकर हुई.

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