Sunderlal Bahuguna: पर्यावरणविदों के लिए दुखद खबर, Chipko Movement के लीडर का कोविड 19 के कारण निधन

NEW DELHI, INDIA � NOVEMBER 22: Veteran environmentalist and Chipko movement leader, Sunderlal Bahuguna during a press conference in New Delhi on Sunday, November 22, 2009. (Photo by Shekhar Yadav/The India Today Group via Getty Images)
NEW DELHI, INDIA � NOVEMBER 22: Veteran environmentalist and Chipko movement leader, Sunderlal Bahuguna during a press conference in New Delhi on Sunday, November 22, 2009. (Photo by Shekhar Yadav/The India Today Group via Getty Images)

कोविड 19 के कारण भारतीय Environmentalist सुन्दरलाल बहुगुणा(Sunderlal Bahuguna) का शुक्रवार को निधन हो गया है। सुन्दरलाल बहुगुणा(Sunderlal Bahuguna) ने देश की आजादी से जुड़े कई विरोध प्रदर्शन का हिस्सा भी रह चुके हैं, जिसमें 1965- 1970 तक शराब विरोधी अभियान और छुआछूत के खिलाफ आंदोलन शामिल है।

भारतीय पर्यावरणविद(Environmentalist) सुन्दरलाल बहुगुणा(Sunderlal Bahuguna) का शुक्रवार को कोविड 19(Covid-19) के कारण निधन हो गया है। सुन्दरलाल बहुगुणा(Sunderlal Bahuguna) साल 1974 में उत्तर प्रदेश में हुए Chipko Movement(चिपको आन्दोलन) के नेता थे और भारत को आजादी दिलाने में भी उनका बहुत बड़ा हाथ था। सुन्दरलाल बहुगुणा भारत के पहले Environmentalist में से थे, जिनको उनके काम के लिए कई पुरस्कार मिले हैं।

शुक्रवार को आई एक खबर के अनुसार, Chipko Movement के नेता का उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित AIIMS अस्पताल में निधन हो गया है। वह 94 साल के थे और कई दिन पहले इस जानलेवा वायरस का शिकार हुए थे। 9 जनवरी, 1937 में उत्तराखंड के टिहरी जिले के करीब एक छोटे से गांव, मरोड़ा में जन्मे Bahuguna, एक सच्चे गांधीवादी थे और अपने जीवन में हमेशा महात्मा गांधी के सिद्धांतों को अपनाते थे।

भारत के मशहूर पर्यावरणविदों के अलावा बहुगुणा, एक लेखक भी थे, जिन्होंने कई  प्रसिद्ध किताबें जैसे 'धरती की पुकार', 'India's Environment: Myth and Reality' और 'Environmental crisis and Humans at risk: Priorities of Action' समेत अन्य किताबें लिखी हैं। इसके अलावा साल 2013 में जेम्स जॉर्ज अल्फ्रेड द्वारा उन पर एक किताब 'Ecology is Economy: The Activism and Environmentalism of सुन्दरलाल बहुगुणा(Sunderlal Bahuguna)' भी लिखी गई थी।

अहिंसा के खिलाफ बोलने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता श्री देव सुमन के मार्गदर्शन में 13 साल की उम्र से ही सामाजिक गतिविधियों के खिलाफ लड़ने वाले बहुगुणा ने देश की आजादी से जुड़े कई विरोध प्रदर्शन का हिस्सा भी रह चुके हैं, उन्होंने भारत में छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई थी। साल 1965- 1970 तक उन्होंने पहाड़ी महिलाओं को एकत्रित कर के शराब विरोधी अभियान शुरू किया था। 

साल 1947 से पहले अंग्रेजों के शासन के खिलाफ लड़ने वाले बहुगुणा 26 मार्च, 1974 में उत्तर प्रदेश में उनके प्रसिद्ध योगदान में से एक Chipko Movement(चिपको आन्दोलन) की शुरुआत की थी। इस आंदोलन का मकसद पेड़ों को कटने से बचाना था और इस आंदोलन का मशहूर नारा 'Ecology is Economy' Bahuguna ने ही लिखा था। साथ ही सुन्दरलाल बहुगुणा(Sundarlal Bahuguna)  1980 के दशक से लेकर साल 2004 तक चले टिहरी बांध विरोधी अभियान का हिस्सा भी रहे हैं। उन्हें उनके द्वारा किए गए कामों के लिए साल 1987 में Right Livelihood Award, 1986 में Jamnalal Bajaj award और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।

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