Ivermectin News: कोरोना वायरस के इस्तेमाल में कितनी असरदार है आइवरमेकटिन दवा? जानें एक्सपर्ट्स की राय

कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए WHO ने आइवरमेकटिन दवा के इस्तेमाल से साफ इनकार किया है। वहीं दूसरी तरफ विदेशों में कुछ वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

पूरे विश्व में कोरोना वायरस के संक्रमण से हाहाकार मचा हुआ है। ऊपर से वैक्सीन और अस्पतालों में बेड की किल्लत से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। वैक्सीन के उत्पादन में थोड़ा आराम दिया गया है, लेकिन वैक्सीन के उत्पादन के पहले इस बीमारी के इलाज के लिए हाइड्रोक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल किया जा रहा था।यह दवा वैसे तो मलेरिया के बुखार को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाती है लेकिन इस दवा ने कोरोना संक्रमण वाले मरीजों पर भी काफी अच्छा असर दिखाया था। कोरोना की दूसरी लहर में यह काम आइवरमेकटिन नाम की दवा कर रही है।  लेकिन WHO ने कहा  है कि यह दवा कोरोना वायरस संक्रमण में कारगर नहीं है।

गोवा सरकार ने तो इस दवा को अपने राज्य में 18 वर्ष से ज्यादा आयु वाले संक्रमित मरीजों के ऊपर इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है। इतना ही नहीं, यदि विदेशों की तरफ रुख करें तो इटली, जापान, अमेरिका जैसे देश भी  इस दवा का इस्तेमाल, कोरोना संक्रमित मरीजों के ऊपर कर रहे हैं।

आईवरमेक्टिन दवा, US-FDA द्वारा पास की गई दवा है जो खासकर, राउंडवर्म यानी कीड़ों के इन्फेक्शन को दूर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। कोरोना वायरस के दौर में बहुत से डॉक्टरों ने यह दावा किया है, कि इस दवा को नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति को ठीक किया जा सकता है। इंटरनेट पर ऐसे बहुत से रिसर्च पेपर मौजूद हैं जो इस बात का दावा करते हैं कि इस दवा का इस्तेमाल करके कोरोना संक्रमित मरीज को ठीक किया जा सकता है। लेकिन यदि WHO के सुझाव की तरफ रुख किया जाए तो उनका मानना यह है कि इस दवा का कोरोना वायरस संक्रमण के साथ कुछ भी लेना देना नहीं है,और यह कोरोनावायरस संक्रमित मरीज को ठीक नहीं करने में सक्षम नही है।  

WHO की चीफ साइंटिस्ट डॉ सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि किसी भी बीमारी पर कोई नई दवा इस्तेमाल करने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रभावकारिता को आंका जाता है। बिना रिसर्च के हम किसी भी प्रकार का दावा नहीं कर सकते इसलिए WHO, आइवरमेकटिन दवा को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर कारगर नहीं मानता।

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